Home Universities सम्पूर्णानन्द संस्कृत विवि में संचालित होगा कृषि मे डिप्लोमा कोर्स  

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विवि में संचालित होगा कृषि मे डिप्लोमा कोर्स  

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वाराणसी

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि संस्कृत से भारतीय संस्कृति की पहचान वैश्वीक रूप से है।भारत कृषि प्रधान देश है। हमारे ऋषि मुनियों ने भारतीय कृषि को कैसे सम्पूर्ण देश में जीवन का एक अंग बनाया। जिसमें पेड़-पौधे, अन्न, जीव-जन्तु सभी को एक दूसरे के पूरक बनाने के लिये सभी एक दूसरे के जरूरत बन गये।

 

कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि हमारे संस्कृत महाविद्यालयों के पास 10 से 30 एकड़ भूमि कृषि योग्य है जिसमें भारतीय कृषि पद्धति से संस्कृत शास्त्रों या संस्कृत वांगमय में कृषि कार्य कराने की जो पद्धति निहित है उसी के अनुसार  संस्कृत भारती और इस विश्वविद्यालय नें 'कृषि में डिप्लोमा पाठ्यक्रम' (एक वर्षीय पाठ्यक्रम) तैयार किया है 

 

संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महासचिव श्रीशदेव पुजारी विश्वविद्यालय में आकर संस्कृत विद्यार्थियों के लिये रोजगार और संस्कृत के व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार हेतु यह एक वर्षीय कृषि डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने  के लिये सहयोग दे रहे हैं। इससे क्षेत्रीय लोगों मे संस्कृत शास्त्र में निहित कृषि शास्त्र के ज्ञान में अभिवृद्धि और लोगों मे अभिरुचि होगी। 

 

कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी  ने बताया कि भारतीय कृषि माध्यमों से ही भारत की पहचान है आज भारतीय कृषि को बढ़ावा देने के लिये संस्कृत वांगमय के आधार पर कृषि शास्त्र मे डिप्लोमा पाठ्यक्रम संस्कृत भारती के द्वारा तैयार किया गया है जिसे यहाँ के भी विद्वानों एवं कृषि विशेषज्ञों के सहयोग से और व्यवस्थित कर नियमानुसार पाठ्यक्रम प्रारम्भ किया जायेगा। इसके आधार पर यहां के विद्यार्थियों को रोजगार के विभिन्न अवसर प्राप्त होंगे तथा संस्कृत शास्त्रों को बढावा मिलेगा। 

 

कुलपति प्रो त्रिपाठी ने बताया कि इस कोर्स पाठ्यक्रम में सबसे तकनीकी मुद्दों के गहन ज्ञान और कृषि में अध्ययन को आरक्षित करना है. इस कोर्स में, छात्र खेतों और पशुधन प्रबंधन जैसे कि खेतों में चल रहे कीट, जलवायु और बुनियादी प्रबंधन प्रथाओं से निपटने वाले विषयों का अध्ययन करते हैं।


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