Home Universities राम मंदिर पर फैसले का विरोध कर रहे थे जेएनयू के वामपंथी छात्र, तभी एबीवीपी वाले पहुंच गए, फिर...

राम मंदिर पर फैसले का विरोध कर रहे थे जेएनयू के वामपंथी छात्र, तभी एबीवीपी वाले पहुंच गए, फिर...

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नई दिल्ली
एक ओर जहां राम मंदिर और बाबरी के विवाद को खत्म करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया वहीं दोनों पक्षों के द्वारा फैसला स्वीकार किए जाने के बाद भी कुछ लोगों को यह फैसला रास नहीं आ रहा है। वैचारिक क्रांति के नाम पर अलगाव की बात करने वाले दिल्ली स्थित जेएनयू के कुछ छात्रों ने शनिवार को साबरमती ढाबे पर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि उनके प्रदर्शन के जवाब में जब एबीवीपी के कार्यकर्ता एकत्रित हुए तो माहौल एकदम पलट सा गया।

 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि वामपंथी संगठन से जुड़ा एक छात्रनेता कह रहा है कि अयोध्या भूमि टाइटल मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 'अनुचित' था। विरोध करने वाले छात्र कहते हैं, 'जय श्री राम लीगल हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लीगल कर दिया है। ये पब्लिक नारा बन गया है। इसे याद रखना। इससे निराश नहीं होना है।'

 

वीडियो में दिख रहा है कि एक छात्र नेता कह रहा है कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन मिली है, जो उस भूमि का दोगुना है, जो कभी विवादित थी। उसने कहा, 'इस तरह से तो मुस्लिम पक्ष जीत गया है। लेकिन यह जमीन का सवाल नहीं था। यह गरिमा का सवाल था। यह अधिकार और न्याय का प्रश्न है। यह कभी जमीन के बारे में था ही नहीं। 1992 के विध्वंस के बाद जो भी दंगे हुए, उसमें केवल मुसलमानों ने ही अपनी जान गँवाई। यूपी में, मुंबई में और फिर गुजरात में दंगे हुए। तुम्हारा नरेंद्र मोदी भी उसी का प्रोडक्ट है। वह बाबरी मस्जिद विध्वंस का प्रोडक्ट है। भारतीय राजनीति का मौजूदा स्थिति भी उसी बाबरी मस्जिद विध्वंस की उपज है। ये तुम्हें नहीं भूलना है और वही मोदी जी आज आपको अयोध्या के फैसले पर देश को संबोधित करते हैं। ये चीजें नहीं भूलनी है। हमें निराश नहीं होना है।'

 

हालांकि मजेदार बात यह रही कि वामपंथी छात्र संगठनों का प्लान एबीवीपी को पता लग गया। इसके बाद साबरमती ढाबे पर एबीवीपी के कार्यकर्ता भी एकत्रित हो गए। बस फिर क्या था, बड़ी संख्या में एकत्रित हुए एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने 'जय श्रीराम' और 'रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे' जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए।  इन नारों की गूंज इतनी अधिक थी कि चंद वामपंथी छात्रों की आवाज दब गई और उन्हें वहां से वापस जाना पड़ा। अच्छी बात यह रही कि वैचारिक लड़ाई सिर्फ शब्दों तक की सीमित रही। मौके पर किसी तरह की हिंसा नहीं हुई। पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल विडियो में देखिए। विडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें।

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