Home Universities जेआईबीएस ने आपराधिक व्यवहार को समझने के लिए किया ऑनलाइन पाठ्यक्रम का आयोजन 

जेआईबीएस ने आपराधिक व्यवहार को समझने के लिए किया ऑनलाइन पाठ्यक्रम का आयोजन 

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नई दिल्ली

हरियाणा के सोनीपत स्थित ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) के जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज (जेआईबीएस) ने हाल ही में सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, जैविक और सामाजिक द्दष्टिकोण से आपराधिक व्यवहार को समझने और इसके बारे में पता लगाने के लिए एक ऑनलाइन स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (सर्टिफिकेट कोर्स) का आयोजन किया। ‘अंडरस्टैंडिंग क्रिमिनल बिहेवियर’ विषय पर तीन दिवसीय स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में लगभग 220 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस पाठ्यक्रम में ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों के छात्रों के साथ-साथ भारतभर के छात्र शामिल हुए। 

 

जेआईबीएस के मुख्य निदेशक प्रोफेसर संजीव पी. साहनी ने कहा, 'कोर्स आपराधिक व्यवहार के विभिन्न पहलुओं की विश्लेषणात्मक और वैचारिक समझ विकसित करने के उद्देश्य से किया गया था। सत्र में स्पष्ट हुआ कि क्या होगा अगर मनोवैज्ञानिक पक्षपात आपराधिक न्याय प्रणाली के सदस्यों को प्रभावित करता है और कैसे पता लगाया जाए कि फोरेंसिक सबूत सच कह रहे हैं।' सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने चश्मदीद गवाह, सीरियल किलर के आपराधिक व्यवहार, सफेद कॉलर अपराध (व्हाइट कॉलर क्राइम), फोरेंसिक मनोविज्ञान, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध की पेचीदगियों के बारे में भी चर्चा की। सत्र में प्रमुख क्षेत्रों जैसे कि छल को समझना शामिल रहा। इसके अलावा हर साल लगभग 70 प्रतिशत गलत तरीके से दोषी पाए जाने जैसे मामलों पर भी चर्चा की गई। इस बात पर भी विमर्श हुआ कि गलत सबूतों के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि प्रत्यक्षदर्शी द्वारा गलत पहचान, खराब कानून व्यवस्था, गलत बयान और फोरेंसिक सबूतों की गलत प्रस्तुति आदि। 

 

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हालांकि तकनीक में वृद्धि होने और मनोवैज्ञानिक-शारीरिक विज्ञान के बारे में अधिक जानकारी होने के साथ, आज यह पता लगाना संभव है कि कोई व्यक्ति सटीक जानकारी प्रदान कर रहा है या नहीं। इस पहलू पर भी सत्र के दौरान विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान जेआईबीएस प्राध्यापकों और अनुसंधान विद्वानों ने विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे, जिसमें आपराधिक स्पष्टीकरण और आपराधिक न्याय एजेंसियों के मूल्यांकन जैसे पहलू शामिल रहे। 
आईएएनएस 

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