Home Universities गढ़वाल विवि ने दी मानद उपाधि, जानें, NSA अजीत डोभाल की जिदंगी की दिलचस्प बातें

गढ़वाल विवि ने दी मानद उपाधि, जानें, NSA अजीत डोभाल की जिदंगी की दिलचस्प बातें

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देहरादून
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने मानद उपाधि से नवाजा है। यह उपाधि विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को प्रदत्त की गई। विश्वविद्यालय के स्वामी मनमंथन प्रेक्षागृह के चौरास परिसर में दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक थे।

 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की मौजूदगी में 451 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई जिनमें 45 छात्रों विद्यार्थियों गोल्ड मेडल से नवाजा गया। डोभाल को भी विश्वविद्यालय ने मानद उपाधि दी। इस मौके पर डॉ निशंक ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई तक सीमित न रहकर अपने लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अनेक ऐसे लोग हैं जिन्होंने देश के साथ-साथ उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है और अजीत डोभाल उनमें से एक हैं। इस अवसर पर डोभाल ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे पढ़ाई के बाद एक योद्धा के रूप में उभर कर देश की सेवा करें।

 

अजीत डोभाल 1968 केरल बैच के आईपीएस अफसर हैं। नियुक्ति के चार साल बाद ही इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए थे। अजीत डोभाल ने करियर में ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया है। उनके बारे में कहा जाता है कि वह 7 साल तक पाकिस्तान में खुफिया जासूस रहे।

 

अजीत डोभाल और अंत में देश के सबसे कामयाब अफसरों में गिने जाने वाले NSA अजित डोभाल के बारे में बात करेंगे। डोभाल का करियर एक से बढ़कर एक रेकॉर्ड से भरा पड़ा है। डोभाल को करियर के शुरुआती 6 साल के अंदर ही पुलिस मेडल मिल गया था, जिसके लिए 17 साल की सर्विस की जरूरत होती है।

 

कंधार विमान अपहरण के दौरान लोगों को छुड़ाने में भी अजित डोभाल ने अहम भूमिका निभाई थी। डोभाल पहले ऐसे पुलिस ऑफिसर हैं जिन्हें 1988 में कीर्ति चक्र से नवाजा गया, जिसे सिर्फ सैन्य बलों के जवानों को अदम्य साहस दिखाने के लिए दिया जाता था। डोभाल की फिटनेस का ही नतीजा है कि 72 साल की उम्र में वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैसा अहम पद संभाल रहे हैं।

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