Home School कुर्सी के अहंकार में चूर लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार भूले महिला पत्रकार से बात करने की 'मर्यादा'

कुर्सी के अहंकार में चूर लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार भूले महिला पत्रकार से बात करने की 'मर्यादा'

EduBeats

लखनऊ
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर ढेरों सवालों के बीच एजुकेशन बीट्स लगातार आपको आरोपों के उस पहलू से रूबरू कराता है जो समाज में एक सकारात्मक संदेश देते हैं। लेकिन शिक्षा व्यवस्था सुधारने में लगे सूबे के हजारों टीचर्स के साथ कई ऐसे अधिकारी भी हैं, जो लगातार योगी सरकार की मुहिम और कोशिश को अपने पैर की जूती समझते हैं। ऐसे ही एक अधिकारी हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार। सरकारी अफसरशाही के अहंकार में चूर दिनेश कुमार की ख्वाहिशें आपको हैरान कर देंगी। दिनेश पत्रकारों से कहते हैं, 'मैं सरकारी अधिकारी हूं... मुझसे सर बोलकर बात किया करिए।' इतना ही नहीं, दिनेश की भाषा और बात करने का तरीका सुनकर आपको उनके अनुशासन, व्यवहार और शिक्षा पर भी सवाल खड़ा करने का मन करेगा।

 

दरअसल, एजुकेशन बीट्स ने 'देश की पहचान- सरकारी स्कूल' अभियान के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी विद्यालयों को आम लोगों से गोद लेने की अपील की है। अभियान के तहत स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि वहां शिक्षा के स्तर को सुधारा जाएगा। इसी क्रम में एजुकेशन बीट्स की संपादिका दिव्या गौरव त्रिपाठी ने राजधानी लखनऊ के जोन-2 स्थित फैजुल्लागंज के प्राथमिक विद्यालय को गोद लेने का फैसला किया था। आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर विद्यालय में एक छोटे कार्यक्रम की योजना थी। इसी के तहत जब एजुकेशन बीट्स की रिपोर्टर कार्यक्रम में कुछ बच्चों को शामिल करने की अनुमति लेने के लिए लखनऊ बीएसए ऑफिस गईं तो वहां बीएसए दिनेश कुमार मौजूद नहीं थे। वह वापस कब तक आएंगे, यह जानने के लिए जब रिपोर्टर अलीशा खान ने दिनेश को फोन किया तो वह भड़क गए। कहने लगे कि सरकारी अधिकारी के नाम के साथ 'जी' लगाकर नहीं, बल्कि 'सर' लगाकर बात करिए।

 

यह बोलीं एजुकेशन बीट्स की रेजीडेंट एडिटर
इस मामले में एजुकेशन बीट्स की रेजीडेंट एडिटर दिव्या गौरव त्रिपाठी ने कहा कि बीएसए लखनऊ दिनेश की भाषाशैली एक सम्मानित पत्रकार के साथ वाकई हैरान करने वाली थी। उन्होंने कहा, 'हमारे पत्रकार प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में जाते हैं, वहां हर रोज कई बच्चे आते हैं। फैजुल्लागंज के स्कूल में तो मैंने खुद देखा है कि बच्चे हर रोज आते हैं। दरअसल सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, संभवतः इसलिए भी वो स्कूल जाते होंगे। यही देखकर हमने प्लान किया कि 26 जनवरी को उस स्कूल में एक 8-10 बच्चों के साथ कार्यक्रम किया जाए, उनसे पौधारोपरण कराया जाए। लेकिन स्कूल की प्रधानाचार्य संगीता वर्मा ने कहा कि वह बिना बीएसए की इजाजत के बच्चों को कार्यक्रम में नहीं बुला सकतीं। हमने भी सोचा कि जब बच्चे रोज आते ही हैं तो आराम से अनुमति मिल जाएगी। लेकिन अनुमति नहीं मिली। वह कोई बड़ा विषय नहीं था। बड़ा विषय यह था कि बेसिक शिक्षा के जिले के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति बात करने का सलीका तक नहीं जानता।' दिव्या ने कहा कि आज सरकार की कोशिशों को ऐसे अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। यह वाकई बेहद शर्मनाक है।

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