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ABVP का राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू, HC के पूर्व जस्टिस बोले- जल्द विश्वगुरु बनेगा भारत

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आगरा
उत्तर प्रदेश के आगरा कॉलेज मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के 65वां राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हो चुका है। शनिवार को पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज एन नरसिम्हा रेड्डी ने राष्ट्रीय अधिवेशन का उदघाटन किया। एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल, डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरविंद कुमार दीक्षित भी पहुंचे।

 

अधिवेशन में एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महामंत्री की घोषणा की गई। डॉ. एस. सुब्बैया फिर से एबीवीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। सुबैय्या कैंसर विशेषज्ञ हैं। जेएनयू छात्रसंघ का चुनाव लड़ चर्चा में आईं निधि त्रिपाठी को राष्ट्रीय महामंत्री घोषित किया गया। अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से कुल 2000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

 

 

एन नरसिम्हा रेड्डी ने कहा कि भारत विश्व गुरु बनने की तरफ अग्रसर है और इसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि गणित से लेकर जितने भी विषय थे सभी के ज्ञाता भारतीय ही थे। ज्ञान और संस्‍कृति हमें विरासत में मिला है। वो दिन दूर नहीं जब शिक्षा के क्षेत्र में भी दुनिया का प्रतिनिधित्‍व भारत करेगा।

 

 

राष्ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ एस सुब्‍बैया ने कहा कि ये वामपंथी लोग थे जिन्‍होंने गलत इतिहास लिख कर भारतीय संस्कृति पर विषैले तीर चलाए। हमारा भारत तो भगवान श्रीराम और श्रवण कुमार की भूमि रहा है। हम ऐसे विषैले तीर चलाने वालों को खत्‍म कर देंगे। उन्‍होंने कहा कि जो भारत का इतिहास वामपंथी इतिहासकारों ने लिखा है वो गलत है। इसे पूरी तरह से पौराणिक कथाओं और संस्‍कृति के आधार पर दोबारा लिखा जाना चाहिए। इसके आगे उन्होंने कहा कि राष्‍ट्र का पुननिर्माण तभी माना जाएगा जब गरीबी नहीं रहेगाी, देश संयुक्‍त राष्‍ट्र परिषद का स्‍थाई सदस्‍य बनेगा, अधिकृत राष्‍ट्रीय भाषा हिंदी होगी और आयात निर्यात डॉलर की जगह रुपए में होगा।

 

 

राष्‍ट्रीय महामंत्री बनने के बाद निधि त्रिपाठी ने कहा कि मैं संगठन के अधिवेशन में सबसे अंतिम पंक्ति में बैठकर नारे लगाती थी, आज आप सभी के सामने हूं। संगठन में मुझे देश का नेतृत्व करने का दायित्व दिया गया है। मैं छात्राओं से कहना चाहूंगी कि नामुनकिन कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि एबीवीपी की लंबे समय से मांग थी कि अनुच्छेद 370 की समाप्त किया जाए। उनका कहना है कि महिला उत्‍पीड़न की घटनाएं जब देश में बढ़ने लगीं तो एबीवीपी ने छात्राओं को आत्‍मरक्षा का प्रशिक्षण दिया और इस लायक बनाया कि अपनी रक्षा स्‍वयं कर सकें। युवा पीढ़ी और छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने के साथ समाज और राष्ट्र की समस्याओं की तरफ ध्यान देना चाहिए।

 

 

बताते चलें कि कि देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में सक्रिय रूप से काम करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की 2018 में देश के अलग-अलग शैक्षिक संस्थानों में कुछ 28,36,922 विद्यार्थियों ने एबीवीपी की सदस्यता ली थी। विद्यार्थी परिषद का गठन 1948 में हुआ था। 71 साल के सफर में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता रहे तमाम लोग केंद्र और प्रदेश सरकारों के शीर्ष पदों पर काम कर चुके हैं।

 

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