Home Others भारत में मजबूत राजनीतिक प्रणाली पर भ्रष्ट नेताओं की मानसिकता देश की उन्नति में बाधक

भारत में मजबूत राजनीतिक प्रणाली पर भ्रष्ट नेताओं की मानसिकता देश की उन्नति में बाधक

EduBeats

भारत में राजनीतिक प्रणाली, देश के नागरिकों को अपने अनुसार सरकार चुनने का अधिकार देती है। क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, हमारे देश में जनता सरकार का निर्माण करने में अपना योगदान देती है और अगले चुनाव के दौरान सरकार से असंतुष्ट होने पर सरकार को बदलने की शक्ति रखती है। राजनेता लोगों को सरकार के माध्यम से योजनाओ को अवगत कराते हैं। राष्ट्र को मजबूत और प्रभावशाली बनाने के लिए लोगो को राजनेताओ के निर्देशों का पालन करना पड़ता है। राजनीति किसी भी सरकार का आधार होती है । अपने वोट बैंक के समर्थन को भरने के लिए राजनेता  विभिन्न कार्यक्रमों को अंजाम देते है। हमारे देश में कुछ ईमानदार राजनीतिक नेता हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे अधिकांश नेता भ्रष्ट हैं। 


जाहिर है कि राजनेताओ की भ्रष्ट मानसिकता देश की उन्नति में बाधक बनकर खड़ी है। इस भ्र्ष्ट राजनीति की वजह से देश की आम जनता पीड़ित है। जाहिर है कि आम आदमी प्रत्येक महीने हर प्रकार के टैक्स भरता है। लेकिन फिर भी सड़के और बाकी सभी मुश्किलें वैसी की वैसी है। भ्र्ष्टाचार राजनीति का एक गंदा चेहरा बनकर और उभर कर सामने आ रहा है। आम लोगों को इसकी परख करनी होगी और सही नेताओं और राजनितिक पार्टियों का चुनाव करना होगा। देश में कुर्सी को जीतने के लिए एक राजनितिक दल दूसरे दल के खिलाफ झूठी खबर फैलाते हैं।


हमेशा राजनेता वोट के वक्त भाषण देते हैं और अपनी पार्टी को सही और दूसरी पार्टी को हर मामले में गलत ठहराते है। वोट ज़्यादा प्राप्त करने के लिए हर राजनितिक दल अपना हथकंडा अपनाते है। आप कह सकते है, राजनेता अधिक वोट प्राप्त करने के लिए साम, दाम, दंड, भेद जैसी रणनीति का इस्तेमाल करना नहीं भूलते है।


देश को उन्नति के मार्ग पर ले जाने के लिए देशवासी टैक्स भरते हैं। भ्र्ष्ट राजनेता उन मेहनत के पैसो को अपने जेब में भर लेते हैं। हिन्दुस्तान को आजादी के पश्चात जितना विकास करना चाहिए था, उतना विकास दुर्भाग्यवश इन भ्र्ष्ट राजनेताओ के कारण नहीं कर पाया है। अधिकतर चुनावों में यही देखने को मिलता है। लोग ऐसे भ्र्ष्ट नेताओ को समर्थन कर बैठते है और बाद में उन्हें निराश होना पड़ता है।


आपको बता दें कि भारत में दो प्रमुख राजनीतिक दल है, एक है भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस। हर राजनैतिक दल के समक्ष एक प्रतीक चिन्ह होता है, जिसे चुनाव आयोग के पास पंजीकृत होना जरूरी है। इन प्रतीक चिन्हो को पहचानकर अशिक्षित गरीब लोग वोट दे सकते हैं। 


इतनी मजबूत व्यवस्था होने बावजूद जिस दल को चुनाव में बहुमत मिलता है वह सत्ता में आ जाती है। लोगों द्वारा देश की सरकार देश हित की उम्मीद से बनायी जाती है। आम जनता को बहुत सारी मुश्किलें अपने दैनिक जीवन में झेलनी पड़ती है। जिसका प्रमुख कारण, हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था के अंदर भ्रष्टाचार है।


अगर आपको चुनाव में खड़े होने वाला कोई भी उम्मीदवार योग्य और उपयुक्त नहीं लगता है, तो हम NOTA का उपयोग कर सकते है। इसका मतलब है नॉन ऑफ़ दा अबोव। इस प्रणाली को निर्वाचन आयोग ने विकसित किया है, ताकि वह जान सके कि कितने प्रतिशत लोग किसी भी उम्मीदवार को वोट देने लायक नहीं समझते है। पहली बार नोटा विकल्प का उपयोग 2013 में हुआ था। भारतीय निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनावों में इस NOTA बटन को उपलब्ध करवाया था।


विद्यार्थियों को आंदोलन के नाम पर थोड़ फोड़ करने के लिए उकसाते है। ऐसे विद्यार्थी अपने जिन्दगी के मार्ग में गुम हो जाते है और समाज विरोधी कार्यो के दलदल में फंस जाते है।छात्रों को बिना सोचे समझे राजनीति में भाग नहीं लेना चाहिए। छात्रों को विद्या ग्रहण करने के साथ देश की राजनीति का सम्पूर्ण अध्ययन करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने मत उजागर करने चाहिए और मताधिकार का सोच समझ कर उपयोग करना चाहिए। झंडे और डंडे वाली राजनीति में नहीं कूदना चाहिए। देश को ईमानदार और कड़ा परिश्रम करने वाले नेताओ की ज़रूरत है। हमे जागरूक नेताओ की जरूरत है, जो देश के सुन्दर आज और भविष्य का निर्माण कर पाए। 
 


अड्डेबाजी

छपास प्रेमी

छपास प्रेमी

तस्वीरों में देखिए

UP में एक साल बाद खुले प्राथमिक विद्यालय, फूल और गुब्बारों से सजे स्कूलों में हुआ बच्चों का स्वागत
UP में एक साल बाद खुले प्राथमिक विद्यालय, फूल और गुब्बारों से सजे स्कूलों में हुआ बच्चों का स्वागत
उत्तराखंड संस्कृत विवि में तीन दिवसीय पुस्तक प्रर्दशनी का उद्घाटन
उत्तराखंड संस्कृत विवि में तीन दिवसीय पुस्तक प्रर्दशनी का उद्घाटन
पौधारोपरण कर मनाया गया गणतंत्र दिवस, देखें फैजुल्लागंज सरकारी स्कूल की खास तस्वीरें
पौधारोपरण कर मनाया गया गणतंत्र दिवस, देखें फैजुल्लागंज सरकारी स्कूल की खास तस्वीरें
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाई श्रीनिवास रामानुजन की जंयती
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाई श्रीनिवास रामानुजन की जंयती
यूपी के पहले डीआईजी सिराजुद्दीन अहमद के बेटे ने लविवि को सौंपी उनकी 100 साल पुरानी डिग्रियां
यूपी के पहले डीआईजी सिराजुद्दीन अहमद के बेटे ने लविवि को सौंपी उनकी 100 साल पुरानी डिग्रियां
संस्कृत विश्वविद्यालय में यूं मनाया गया गुरुनानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व
संस्कृत विश्वविद्यालय में यूं मनाया गया गुरुनानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व