Home Others सलमान के पिता सलीम खान बोले- 5 एकड़ जमीन पर बनाया जाए स्कूल

सलमान के पिता सलीम खान बोले- 5 एकड़ जमीन पर बनाया जाए स्कूल

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मुंबई
लंबे समय के इंतजार के बाद अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए इसे हमेशा के लिए खत्म कर दिया। फैसले के तहत विवादित भूमि को रामलला विराजमान को दिया जाएगा और अयोध्या में ही किसी और स्थान पर मुस्लिमों को 5 एकड़ जमीन दी जाएगी। फैसला आने के बाद बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के पिता और प्रसिद्ध पटकथा लेखक सलीम खान ने कहा है कि न्यायालय की ओर से मुस्लिम समुदाय को दी गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद के बजाय स्कूल या अस्पताल का निर्माण किया जाना चाहिए।

 

कालजयी शोले और दीवार जैसी फिल्मों की पटकथा लिखने वाले 83 वर्षीय खान ने कहा कि यह अच्छा हुआ कि मामला अंतत: खत्म हो गया। उन्होंने समाचार एजेंसी भाषा से कहा, 'फिल्म की तरह इसका भी पटाक्षेप हो गया। यह कोई मायने नहीं रखता अगर आप इसकी आलोचना करते हैं, या अच्छा बताते हैं या जो कुछ भी कहते हैं, अब यह खत्म हो चुका। यह कई वर्षों से चल रहा था और जटिल बनता जा रहा था। उच्चतम न्यायालय ने समय लिया और फैसला दिया। अब इसपर चर्चा नहीं होनी चाहिए।'

 

खान ने कहा, 'हमें नमाज अदा करनी होती है लेकिन यह कहीं भी की जा सकती है। यात्रा के दौरान रेलगाड़ी और विमान में नमाज पढ़ी जा सकती है। महत्वपूर्ण यह है कि जगह साफ हो। हमें इसके लिए मस्जिद की जरूरत नहीं है। आज प्राथमिकता स्कूल, कॉलेज, अस्पताल है और हमें उसपर गौर करना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'हमें उस पांच एकड़ जमीन पर स्कूल, अस्पताल और कॉलेज का निर्माण करना चाहिए। हमारे बड़े नेता शिक्षण संस्थाओं से आएंगे। यहां तक की पवित्र कुरान के पहले अध्याय में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया गया है।'

 

सलीम-जावेद की जोड़ी तो याद ही होगी?
सलमान खान के पिता सलीम खान और गीतकार जावेद अख्तर की जोड़ी 70 के दशक में काफी मशहूर रही।  'सरहदी लुटेरा' नामक फिल्म में सलीम हीरो थे, जावेद अख्तर उस फिल्म को असिस्ट कर रहे थे। यहीं इन दोनों की पहली मुलाकात हुई थी। इससे पहले दोनों की कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन इस फिल्म के बाद दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे। फिर दोनों ने पार्टनरशिप शुरू कर दी। सलीम-जावेद तकरीबन 12 साल तक एक दूसरे के साथ काम करते रहे। जिसमें इन्होने एक से बढ़कर एक फिल्में दी। इन फिल्मों में 'सीता और गीता', 'हाथी मेरे साथी', 'यादों की बारात', 'जंजीर', 'हाथ की सफाई', 'दीवार', 'शोले', 'क्रांति', 'त्रिशूल', 'जमाना', 'मिस्टर इंडिया' शामिल थीं। हिंदी फिल्मों के जरिये सलीम-जावेद ने न सिर्फ नाम कमाया बल्कि दूसरे स्क्रिप्ट राइटर्स को भी पहचान दिलाई। इनसे पहले राइटर्स के नाम स्क्रीन पर यूं नहीं आते थे। हिंदुस्तान में स्क्रीनप्ले लिखने की अलग शुरुआत भी सलीम-जावेद ने ही की थी।

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