Home Others हिंदी दिवसः उत्‍तर मध्‍य रेलवे का राजभाषा पखवाड़ा, ऑनलाइन 'स्‍वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता' का हुआ आयोजन

हिंदी दिवसः उत्‍तर मध्‍य रेलवे का राजभाषा पखवाड़ा, ऑनलाइन 'स्‍वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता' का हुआ आयोजन

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प्रयागराज
उत्‍तर मध्‍य रेलवे के मुख्‍यालय में हिंदी दिवस के उपलक्ष्‍य में आयोजित राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत ऑनलाइन 'स्‍वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता' का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में महाप्रबंधक कार्यालय सहित मंडलों एवं कारखानों के वि‍भिन्‍न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने भाग लिया। बताते चलें कि उत्‍तर मध्‍य रेलवे के मुख्‍यालय में 14 सितंबर से आयोजित राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत 23 सितंबर को अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए राजभाषा प्रश्‍नोत्‍तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

 

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने समसामयिक एवं सामाजिक सरोकार से संबंधित विषयों पर गीत, गजल और कविता के माध्‍यम से अपने विचार व्‍यक्‍त किए। प्रतियोगिता में प्रधान मुख्‍य वाणिज्‍य प्रबंधक एमएन ओझा और मुख्‍य मोटिव पावर इंजीनियर/डीजल अनिल कुमार द्विवेदी निर्णायक के रूप में उपस्थित थे।

 

प्रतियोगिता में श्‍याम श्रीवास्‍तव, वरिष्‍ठ तकनीशियन/दूरसंचार, डबरा को प्रथम स्‍थान, पीके ओझा, निरीक्षक/रेल सुरक्षा बल, कानपुर को द्वितीय स्‍थान और जितेन्‍द्र सिंह, कार्यालय अधीक्षक, परिचालन शाखा, मुख्‍यालय को तृतीय स्‍थान प्राप्‍त हुआ।

 

नि‍र्णायक मंडल के सदस्‍यों ने प्रति‍भागियों द्वारा काव्‍यपाठ हेतु चुने गए पारंपरिक एवं समाकालीन विषयों की सराहना की। प्रतियोगिता का संचालन राजभाषा अधिकारी यथार्थ पाण्‍डेय द्वारा किया गया। वरिष्‍ठ राजभाषा अधिकारी चन्‍द्र भूषण पाण्‍डेय द्वारा धन्‍यवाद ज्ञापित किया गया।

 

इस अवसर पर अपने मुख्‍य राजभाषा अधिकारी एवं प्रधान मुख्‍य वाणिज्‍य प्रबंधक महेन्‍द्र नाथ ओझा ने कहा कि कविता में शब्‍द विधान छोटे, सहज और धारदार होने चाहिए। कविता को पढ़ने और सुनने के बीच फासला नहीं होना चाहिए। प्रकट तौर पर अप्रस्‍तुत विधान ही कविता का मूल उपकरण है। आज के युग में कविता में निरी उपदेशात्‍मकता स्‍वीकार्य नहीं है। कविता की सफलता इसी बात में निहित है कि अलंकार, रस, विम्‍ब, शब्‍द जैसे पारंपरिक काव्‍य उपादानों से भी श्रोता के मन में समसामयिक अर्थ और प्रसंग उद्भासित हो उठें।

 

इस क्रम में दूसरे निर्णायक मुख्‍य मोटिव पावर इंजीनियर/डीजल अनिल कुमार द्विवेदी ने कहा कि हमारी रेलवे में बहुत से प्रति‍भाशाली कवि और साहित्‍यकार रेलकर्मी हैं, जिनमें निरंतर उत्‍कृष्‍ट रचनाशीलता की बड़ी संभावनाएं हैं। कविता में व्‍यंजना और लक्षण शक्ति का विशिष्‍ट महत्‍व होता है और ये काव्‍य गुण एक श्रेष्‍ठ कवि के परिचायक हैं।

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