Home Others जयप्रकाश नारायण की जयंती पर जानिए कैसे इंदिरा गांधी ने डर से लगाया आपातकाल

जयप्रकाश नारायण की जयंती पर जानिए कैसे इंदिरा गांधी ने डर से लगाया आपातकाल

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जेपी न होते तो शायद इंदिरा गांधी को कुर्सी बचाने का डर न होता, और तब शायद देश में आपातकाल भी न लगता। आज भी ज्यादातर जानकारों का यही मानना है कि जेपी के आंदोलनों से इंदिरा डर गई थीं और तख्तापलट की वजह से ही उन्होंने देश पर आपातकाल थोपा। आपातकाल के 41 वर्षों के बाद भी लोकतंत्र की हत्या की कड़वी यादें लोगों के जेहन में जिंदा हैं। 

आखिर ऐसा क्या था जेपी से व्यक्तित्व में, उनकी आवाज में कि एक बार में ही जनता का हुजूम उनके साथ खड़ा हो उठता था। वे जहां से गुजरते थे, जनता उनके साथ चल निकलती, वे जहां सभा करते वहां बैठने के लिए जगह कम पड़ जाती थी। 

देश उस पल को कैसे भूल सकता है जब आपातकाल लागू होते ही जय प्रकाश नारायण की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में एक लाख से भी ज्यादा लोग उनके समर्थन में इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। तब शायद इंदिरा गांधी को अहसास नहीं था लेकिन इमरजेंसी हटने के बाद जनता ने उन्हें सत्ता के सिंहासन से उतार दिया और पहली दफा देश में गैर कांग्रेसी सरकार बनी।

आपको बता दें कि एक बार प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जेपी को गृह मंत्री का पद ऑफर किया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। सन 1973 में देश महंगाई और भ्रष्टाचार का दंश झेल रहा था। तब जेपी ने 'संपूर्ण क्रांति' का नारा दिया। शुरुआत गुजरात से हुई। बिहार में बड़ा आंदोलन हुआ। जेपी के आंदोलन से भयभीत तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर ने गोलियां तक चलवा दीं। तीन हफ्ते तक हिंसा जारी रही और अर्द्धसैनिक बलों को बिहार में मोर्चा संभालना पड़ा था।

ऐसा भी माना जाता है कि देश में जेपी का आंदोलन बढ़ रहा था और इंदिरा गांधी के मन में भय पैदा हो रहा था। जानकारों की मानें तो इंदिरा को लगता था कि  विदेशी ताकतों की मदद से जेपी देश में आंदोलन चला रहे हैं, जो उनकी कुर्सी छीन सकता है।

जिसके बाद परेशान होकर 1975 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा ही दिया। जेपी और छह सौ से भी ज्यादा सत्ता विरोधी नेताओं को बंदी बनाकर जेल में डाल दिया गया। जेल जेपी की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी, सात महीने बाद उनको रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आकर जेपी ने हार नहीं मानी और 1977 में जेपी के अगुआई में इंदिरा गांधी का किला ढह गया। वे चुनाव हार गईं। जानकार बताते हैं कि जेपी की वजह से ही इंदिरा गांधी रोने तक पर मजबूर हो गईं थीं।

सब जानते है कि शुरू में जेपी आंदोलन छात्रों और युवाओं की कुछ मांगों तक ही सीमित था, तब राज्य सरकार उनकी मांगे मान लेती तो शायद जनआंदोलन नहीं होता। इधर सरकार अपनी जिद उड़ी थी। जेपी ने भी उम्र के आखिरी पड़ाव में जून 1974 को संपूर्णक्रांति का आह्वान कर दिया। जेपी ने कहा कि देश में जो समस्याएं हैं, मसलन, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई, शिक्षा में गुणवत्ता की कमी ये सब व्यवस्था की ही देन हैं। इन समस्याओं से तभी उबरा जा सकता है जब पूरी व्यवस्था ही बदल दी जाए। ऐसे में सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए संपूर्ण क्रांति की जरूरत है।

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार में सारन के सिताबदियारा में हुआ था। पटना से शुरुआती पढ़ाई के बाद अमेरिका में पढ़ाई की। 1929 में स्वदेश लौटे और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए। तब वे मार्क्सवादी थे। सशस्त्र क्रांति से अंग्रेजों को भगाना चाहते थे।


अड्डेबाजी

छपास प्रेमी

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