Home Others जानें, कैसे डॉ. राममनोहर लोहिया के संघर्षों ने दिलाई थी गोवा को स्वतंत्रता

जानें, कैसे डॉ. राममनोहर लोहिया के संघर्षों ने दिलाई थी गोवा को स्वतंत्रता

EduBeats

आज महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक और राजनेता डॉ. राममनोहर लोहिया की 54वीं पुण्यतिथि है। संयोग से यह वर्ष गोवा क्रांति दिवस की 75वीं एवं गोवा की आजादी का 60वां सालगिरह भी है। डॉ. राममनोहर लोहिया ने 18 जून, 1946 को मडगांव में 451 वर्षो की पुर्तगाली सालाजारशाही औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ गोमंतकों में संघर्ष करने का जज्बा पैदा किया था। 18 जून, 1946 गोवा की आजादी के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित अविस्मरणीय दिन है। शायद यही वजह है कि गोवावासी स्वयं को डा. लोहिया का ऋणी मानते हैं, जबकि डॉ. लोहिया कहा करते थे-मेरा गोवा पर नहीं, गोवा का मुझ पर ऋण है।


आपको बता दें कि डॉ. लोहिया का मानना था कि गोवा भारत का अभिन्न अंग है और बगैर इसकी स्वतंत्रता के भारत की आजादी अधूरी है। तमाम नागरिक स्वतंत्रता एवं प्रतिबंधों के बावजूद डॉ. लोहिया गोवा आए और गोवावासियों को अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ने की प्रेरणा दी। कई बार उनकी गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन पुर्तगाली निजाम उनके हौसले को पस्त नहीं कर सका। 


गोवा मुक्ति संघर्ष में डॉ. लोहिया की अग्रणी भूमिका होने से गोवा मुक्ति संघर्ष समूचे भारत की लड़ाई बन गई। देश के चारों दिशाओं से सेनानियों का जत्था गोवा मुक्ति संग्राम में शामिल होने लगा। उन्हीं स्वतंत्रता सेनानियों में एक थे त्रिदिब चौधरी। तत्कालीन पूर्वी बंगाल के ढाका में जन्मे त्रिदिब बाबू एक स्वतंत्रता सेनानी और कुशल राजनीतिज्ञ थे। रिवाल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक रहे त्रिदिब चौधरी डॉ. लोहिया के घनिष्ठ मित्र भी थे।


डा. लोहिया की अपील पर त्रिदिब बाबू वर्ष 1955 में गोवा मुक्ति आंदोलन में शामिल हुए थे। पुर्तगाली शासन में उन्हें बारह वर्षो की सजा मिली थी, लेकिन उन्नीस महीने की कैद के बाद उन्हें मुक्त कर दिया गया। पुर्तगाल सरकार की जेल में उन्हें अमानुषिक यातनाएं दी गईं। अपने कारावास के दौरान उन्होंने एक जेल डायरी लिखी, जो वर्ष 1960 में एक पुस्तक के रूप में बांग्ला भाषा में प्रकाशित हुई थी।


गोवा की मुक्ति के संघर्ष में डॉ. लोहिया ने न सिर्फ देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को शामिल किया, बल्कि कोंकणी और मराठी भाषाओं के कई साहित्यकारों को भी गोवा मुक्ति आंदोलन से जोड़ा। इन कवियों में बालकृष्ण भगवंत बोरकर, मनोहरराव सरदेसाई, गजानन रायकर, पीएल देशपांडे, वसंत बापट, मंगेश पडगांवकर आदि प्रमुख थे, जिन्होंने अपनी क्रांतिकारी काव्य रचनाओं से गोमंतकों में स्वतंत्रता के इस यज्ञ में शामिल होने की प्रेरणा दी। 


डॉ. लोहिया द्वारा 18 जून, 1946 को जलाई गई अलख धीरे-धीरे विशाल स्वरूप प्राप्त करता चला गया। देश के अनगिनत मुक्ति योद्धा शहीद हुए। अनेकों ने पीड़ादायक देह यातनाएं सहीं। अनेकों को कारागृह में बंदी बनाया गया। इस तरह गोवा के स्वतंत्रता सेनानियों ने त्याग भावना के साथ अपने खून-पसीने तथा आंसूओं के अघ्र्य अर्पित किए, जिसके परिणामस्वरूप 19 दिसंबर, 1961 को सैकड़ों वर्षो की दासता से गोवा मुक्त हुआ। 


गोवा के स्वतंत्र होते ही भारत की अधूरी स्वतंत्रता को पूर्णत्व प्रदान हुआ। हालांकि इतिहास में न तो गोवा मुक्ति संघर्ष के बारे में समग्र रूप से लिखा गया है और न ही इस बारे में शोध अध्ययन को तरजीह दी गई। नतीजतन देश की युवा पीढ़ी गोवा के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष के बारे में अनभिज्ञ है। डॉ. राममनोहर लोहिया की मृत्यु के साढ़े पांच दशक हो चुके हैं। उनके विचारों की प्रासंगिकता दिनों दिन बढ़ती जा रही है। 


देश की नौजवान पीढ़ी को उनके सिद्धांतों से अवगत कराने के लिए दुर्लभ एवं अनुपलब्ध लोहिया साहित्य का प्रकाशन एवं प्रसार करने की जरूरत है। डॉ. लोहिया की पुण्यतिथि पर उनके अनुयायियों को यह बात गांठ बांधनी पड़ेगी कि डॉ. लोहिया के लिए भारतीय भाषाओं का प्रचार-प्रसार कोरे भाषणों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके व्यावहारिक कर्म का हिस्सा था।


अड्डेबाजी

छपास प्रेमी

छपास प्रेमी

तस्वीरों में देखिए

UP में एक साल बाद खुले प्राथमिक विद्यालय, फूल और गुब्बारों से सजे स्कूलों में हुआ बच्चों का स्वागत
UP में एक साल बाद खुले प्राथमिक विद्यालय, फूल और गुब्बारों से सजे स्कूलों में हुआ बच्चों का स्वागत
उत्तराखंड संस्कृत विवि में तीन दिवसीय पुस्तक प्रर्दशनी का उद्घाटन
उत्तराखंड संस्कृत विवि में तीन दिवसीय पुस्तक प्रर्दशनी का उद्घाटन
पौधारोपरण कर मनाया गया गणतंत्र दिवस, देखें फैजुल्लागंज सरकारी स्कूल की खास तस्वीरें
पौधारोपरण कर मनाया गया गणतंत्र दिवस, देखें फैजुल्लागंज सरकारी स्कूल की खास तस्वीरें
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाई श्रीनिवास रामानुजन की जंयती
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाई श्रीनिवास रामानुजन की जंयती
यूपी के पहले डीआईजी सिराजुद्दीन अहमद के बेटे ने लविवि को सौंपी उनकी 100 साल पुरानी डिग्रियां
यूपी के पहले डीआईजी सिराजुद्दीन अहमद के बेटे ने लविवि को सौंपी उनकी 100 साल पुरानी डिग्रियां
संस्कृत विश्वविद्यालय में यूं मनाया गया गुरुनानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व
संस्कृत विश्वविद्यालय में यूं मनाया गया गुरुनानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व