Home Others एजुकेशन बीट्स स्पेशल: सिर्फ 5 प्वाइंट्स में समझें अयोध्या फैसले से जुड़ी सभी बड़ी बातें

एजुकेशन बीट्स स्पेशल: सिर्फ 5 प्वाइंट्स में समझें अयोध्या फैसले से जुड़ी सभी बड़ी बातें

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लखनऊ/दिल्ली/अयोध्या
आज के समय में जब सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर चल रहा है, और टीवी चैनलों को तूतू-मैंमैं से फुर्सत नहीं है, ऐसे में शिक्षा पर आधारित न्यूज पोर्टल एजुकेशन बीट्स की जिम्मेदारी है कि आपको इस फैसले के की-प्वाइंट्स की जानकारी दे। ताकि आप किसी भ्रम में ना रहें और अफवाहों से भी दूर रहें। अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अयोध्या के 2.77 एकड़ विवादित भूमि को रामलला विराजमान को दे दिया, जिससे राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में मुस्लिमों को पांच एकड़ जमीन वैकल्पिक स्थल पर देने का आदेश दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि विवादित स्थल को हिंदुओं को दिया जाना चाहिए और केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया। इससे देश के इतिहास की सबसे लंबे समय से चल रहे विवाद पर विराम लग गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 5 प्वाइंट निम्नलिखित हैं:

 

पहला प्वाइंट
शीर्ष कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिंदुओं को विवादित भूमि शर्तों पर मिलेगी। 2.77 एकड़ का परिसर ट्रस्ट (न्यास) को सौंपा जाएगा, जिसे तीन महीने में गठित किया जाना है। मंदिर निर्माण का प्रबंधन ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा। केंद्र को तीन महीने के भीतर न्यासी बोर्ड नियुक्त करना होगा। मुस्लिमों को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन मिलेगी। शीर्ष कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुस्लिम अंदर के प्रांगण पर अपना विशेष कब्जा नहीं साबित कर सके, जबकि बाहरी प्रांगण हिंदुओं के विशेष कब्जे में है।

 

दूसरा प्वाइंट
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमीन को तीन पक्षों को बांटने के फैसले को गलत बताया, क्योंकि परिसर पूरी तरह से संयुक्त है। इन पक्षों में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड शामिल हैं। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पीठ के दूसरे न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति एस.ए.बोबडे, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर शामिल हैं।

 

तीसरा प्वाइंट
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दूसरे चार न्यायाधीशों के परामर्श से फैसले की तिथि का निर्णय लिया था। मामले में 40 दिनों तक लगातार सुनवाई हुई। यह शीर्ष कोर्ट में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत निर्देश दिया कि निर्मोही अखाड़ा को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। अखाड़ा के मुकदमे को खारिज कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के परिसर का प्रबंधक होने का दावा भी खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट के बनने तक जमीन कानूनी रिसीवर के पास रहेगी।

 

चौथा प्वाइंट
पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से शिया वक्फ बोर्ड की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में दावा किया गया था अयोध्या की विवादित जमीन के बाबरी मस्जिद पर अधिकार उसका सुन्नी वक्फ बोर्ड से ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 2003 की रिपोर्ट को अनुमान के तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता या विवादित स्थल पर ईदगाह के पूर्व अस्तित्व के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। इसमें कहा गया, 'बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जमीन पर नहीं हुआ था।'

 

पांचवा प्वाइंट
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मूल संरचना इस्लामिक नहीं है। लेकिन एएसआई रिपोर्ट यह नहीं कहती कि मूल संरचना एक विशेष मंदिर है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हिंदू अयोध्या को भगवान राम की जन्मस्थली मानते हैं। कोर्ट ने कहा, 'हिंदुओं की निष्ठा अविवादित है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।' फैसले में कहा गया कि निष्ठा एक व्यक्ति की मान्यता का मामला है।
(आईएएनएस से साभार)

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