Home Interview वे दिव्यांगों को सक्षम बनाते हैं, खुद का हाल बेहाल... इन विशेष शिक्षकों की भी सुध लो योगी सरकार

वे दिव्यांगों को सक्षम बनाते हैं, खुद का हाल बेहाल... इन विशेष शिक्षकों की भी सुध लो योगी सरकार

EduBeats

लखनऊ
सरकारें दिव्यांगों के लिए बहुत सी सुविधाओं का लगातार दावा कर रही हैं। लेकिन हकीकत सरकार के दावों से कोसों दूर है। सुनहरे भविष्य की नींव कही जाने वाली शिक्षा व्यवस्था दिव्यांगों के लिए जितनी खस्ताहाल है, उससे कहीं ज्यादा उनके भविष्य की जिम्मेदारी को निभाने वाले विशेष शिक्षकों की हालात खराब है। इन शिक्षकों ने कई बार अपनी बात यूपी सरकार के सामने रखी लेकिन बदले में मिला सिर्फ आश्वासन... दिव्यांग बच्चों में पढ़ने की ललक तो आम बच्चों से कहीं ज्यादा दिखती है तो क्यूँ उनको पढ़ाने वाले शिक्षकों की परेशानी को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है? 

 

आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में नामांकित बच्चों को शिक्षा देने के लिए आज तक स्थाई विशेष शिक्षकों की भर्ती नहीं किया गया जबकि विभाग में सामान्य बच्चों को पढ़ाने के लिए सामान्य शिक्षक रखे गये, उर्दू की शिक्षा के लिए उर्दू डिग्री शिक्षक भर्ती किए गए, विषयवार शिक्षक की भी भर्ती किया गया लेकिन दुर्भाग्यवश 3 लाख के करीब दिव्यांग बच्चों के शिक्षा हेतु आज तक नियमित विशेष शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2016 में कहा गया है कि सभी को शिक्षा का उचित व्यवस्था व अधिकार है तो फिर सवाल ये है कि आज तक दिव्यांग बच्चों के शिक्षा के उनको पढ़ाने वाले विशेष डिग्री व डिप्लोमा किए हुए नियमित विशेष शिक्षक की भर्ती क्यों नहीं की गई।

 

सिर्फ 11 महीने के लिए होती है नियुक्ति
सत्र 2005 से IEDC 1992 स्कीम के तहत उत्तर प्रदेश में 2500 विशेष डिग्री व डिप्लोमा किए हुए विशेष शिक्षक इंटीनरेन्ट टीचर्स व रिसोर्स टीचर्स के पद नाम पर रखा गया और सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह रहा कि इनकी नियुक्ति 11 माह के लिए संविदा पर की गई जबकि इसी योजना में अन्य प्रदेश में 12 महीने के लिए संविदा पर नियुक्त किया गया। अन्य प्रदेश जैसे हरियाणा पंजाब राजस्थान मणिपुर, गुजरात व अन्य प्रदेश में इन विशेष डिग्री व डिप्लोमा किए विशेष शिक्षकों को वेतन बैंड व अन्य समस्त सुविधा राज्य सरकार के अन्य शिक्षकों के भांति लागू कर दिया गया लेकिन उत्तर प्रदेश के विशेष शिक्षकों को आज 11 माह का बहुत अल्प मानदेय ही दिया जा रहा है।

नियमों का खुलेआम हो रहा उल्लंघन
इसके अलावा भारतीय पुर्नवास परिषद की गाइड लाइन में यह साफ साफ लिखा है कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित केवल विशेष डिग्री व डिप्लोमा किए हुए विशेष शिक्षक ही पढ़ा सकते हैं लेकिन फिर भी राज्य सरकार द्वारा सामान्य शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण करा कर कहते हैं कि अब हमारे विद्यालय के पांच दिवसीय प्रशिक्षण लिए हुए शिक्षक ही दृष्टि बाधित, मूक-बधिर, मानसिक बच्चों को पढ़ा लेंगे। वहीं विशेष शिक्षकों की भर्ती भी बेसिक शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय पांच सदस्यीय समिति के बीच बाकायदा इंटरव्यू के माध्यम से हुई है। भारतीय पुर्नवास परिषद की गाइड लाइन में साफ यह कहा गया है एक विशेष शिक्षक 5 से 8 बच्चे ही पढ़ाएगा लेकिन इन्हें उसके विपरीत 20 बच्चों को पढ़ाने को कहा गया है।

 

एजुकेशन बीट्स को योगी सरकार से उम्मीद
इसके अलावा और भी कई समस्याओं का इन विशेष शिक्षकों को सामना करना पड़ता है। इन विशेष शिक्षकों की समस्याओं को लेकर जब एजुकेशन बीट्स ने इनसे बात की तो वे बात करने से भी घबरा रहे थे। डर था कि कहीं उनके मीडिया के सामने आने से उनकी नौकरी खतरे में न पड़ जाए। एजुकेशन बीट्स डॉट कॉम पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता है कि अगर किसी भी विशेष शिक्षक को बेवजह परेशान किया गया तो हम इसे एक आंदोलन के तौर पर चलाएंगे। खैर बहुत भरोसे के साथ विशेष शिक्षा शिक्षक वैलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सिंह ने एजुकेशन बीट्स से बात की और अपनी परेशानियों को साझा किया... हमें उम्मीद है कि सरकार इसकी गंभीरता को समझेगी और बेहद सकारात्मक रुख अपनाएगी...

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