Home Interview संसद तक उठा मुद्दा... पर आज भी यूं अंधेरे में जिंदगी गुजार रहे दिव्यांगों के भाग्यविधाता

संसद तक उठा मुद्दा... पर आज भी यूं अंधेरे में जिंदगी गुजार रहे दिव्यांगों के भाग्यविधाता

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लखनऊ
दिव्यांगों के प्रति समाज के दृष्टिकोण को बदलने में जुटे विशेष शिक्षक खुद की सोच को पिछले 15 वर्षों से सकारात्मक बनाए हुए हैं। सरकारें आईं और चली गईं लेकिन उत्तर प्रदेश में आज भी विशेष शिक्षक अपने अधिकारों को नहीं पा सके हैं। 15 वर्षों से संविदा पर काम कर रहे विशेष शिक्षकों का आज भी सत्यापन नहीं हो पाया है। निराशा में घिर चुके शिक्षकों ने अपनी आवाज सरकारों के सामने रखी तो बदले में मिला सिर्फ आश्वासन। बीते साल 24 सितंबर, 2019 को विशेष शिक्षा शिक्षक वैलफेयर एसोसिएशन,उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे उन्होंने आश्वासन तो दिया लेकिन निर्णय आज तक नहीं ले पाई।

 

लखनऊ में विशेष शिक्षकों ने पटेल प्रतिमा पर धरना भी दिया था। जिसमें भाजपा सांसद कौशल किशोर आए और इन लोगों के पक्ष में आवाज उठाई। उन्होंने कहा था कि विशेष शिक्षकों के अधिकार उन्हें नहीं दिए जा रहे हैं और इनका शोषण किया जा रहा है जबकि ये लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। सांसद कौशल किशोर ने झूलेलाल पार्क में एक कार्यक्रम रखा था। इस कार्यक्रम में राजनाथ सिंह आए थे और मंच से समस्त संविदाकर्मियों और विशेष शिक्षकों से कहा था कि हमारी सरकार आएगी तो 6 महीने के अंदर आप लोगों को मूल अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के ढाई साल बीत जाने के बाद अभी तक कुछ नहीं हुआ। हाल ही में हम विशेष शिक्षक के प्रदेश अध्यक्ष बेसिक शिक्षा मंत्री से मिले थे और ज्ञापन दिया था लेकिन उस पर भी कुछ नहीं हुआ।

 

भारतीय पुर्नवास परिषद की गाइडलाइंस का भी उल्लंघन

भारतीय पुर्नवास परिषद की गाइडलाइन में यह साफ साफ लिखा है कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित केवल विशेष डिग्री व डिप्लोमा किए हुए विशेष शिक्षक ही पढ़ा सकते हैं लेकिन फिर भी राज्य सरकार द्वारा सामान्य शिक्षकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण करा कर कहते हैं कि अब हमारे विद्यालय के पांच दिवसीय प्रशिक्षण लिए हुए शिक्षक ही दृष्टि बाधित, मूक-बधिर, मानसिक बच्चों को पढ़ा लेंगे। वहीं विशेष शिक्षकों की भर्ती भी बेसिक शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय पांच सदस्यीय समिति के बीच बाकायदा इंटरव्यू के माध्यम से हुई है। भारतीय पुर्नवास परिषद की गाइड लाइन में साफ यह कहा गया है एक विशेष शिक्षक 5 से 8 बच्चे ही पढ़ाएगा लेकिन इन्हें उसके विपरीत 20 बच्चों को पढ़ाने को कहा गया है।

 

देखें पूरा इंटरव्यू

इसके अलावा और भी कई समस्याओं का इन विशेष शिक्षकों को सामना करना पड़ता है। इनकी परेशानियां और मांगें क्या हैं, इसे लेकर विशेष शिक्षा शिक्षक वैलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के प्रदेश सचिव आनंद सिंह ने एजुकेशन बीट्स से बात की और अपनी परेशानियों को साझा किया। आनंद सिंह ने उम्मीद जताई है कि इस विषय में सरकार संज्ञान लेगी और उचित कार्रवाई करेगी... देखिए पूरा इंटरव्यू...

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