Home Interview अपने बच्चों की तरह रखते हैं ख्याल, सरकारी स्कूल के प्रिन्सिपल भोला चौधरी बने मिशाल

अपने बच्चों की तरह रखते हैं ख्याल, सरकारी स्कूल के प्रिन्सिपल भोला चौधरी बने मिशाल

EduBeats

देवरिया/लखनऊ

सरकारी स्कूलों का नाम सुनते ही हमारे मन में जो तस्वीर उभर कर आती है, वह तस्वीर होती है टूटी फूटी इमारतों के अलावा बिना टीचर्स वाले क्लासरूम की। जहां शौचालय में ताला इसलिए लगा होता है कि बच्चें शौचालय को गन्दा न कर दें। स्कूल में पंखे नहीं है, पानी की समस्या के साथ कई स्कूलों में बैंच तक नहीं है... जिसके कारण सभी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में ही पढ़ाना पसंद करते हैं। लेकिन सरकारी स्कूलों की इस नकारात्मक तस्वीर को बदलने की कोशिश में उत्तर प्रदेश के हजारों टीचर्स लगे हैं। शिक्षा के ये कर्मवीर अपने द्वारा किए गए प्रयासों से सरकारी स्कूलों की हालत जरूर एक दिन बदलकर रहेंगें... इन्हीं शिक्षा के कर्मवीरों में से देवरिया जिले के प्राथमिक विद्यालय चांदपुर के भोला चौधरी ने एजुकेशन बीट्स से खास बातचीत में बताया कि चांदपुर के सरकारी स्कूल को उन्होंने किस प्रकार बदला....

 

प्रधानाध्यापक भोला चौधरी बताते हैं कि जब उन्होंने स्कूल में पदभार सम्भाला तो उनके स्कूल की स्थिति बहुत खराब थी। स्कूल में कई प्रकार की समस्याएं थी, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया। पहले की अपेक्षा आज उनके विद्यालय में बच्चों की संख्या भी ज्यादा हो गई है। लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को न पढ़ाकर सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं। भोला बताते हैं कि मैं अपनी कार से अपने बच्चों को लेकर जाता हूँ जहां भी कोई प्रतियोगिता होती है। वह बताते हैं कि मैं हमेशा ही इसी प्रयास में रहता हूँ कि हमारे स्कूल के बच्चे बहुत आगे जाएं क्योंकि यही बच्चे हमारी पहचान है।

 

इसी के साथ भोला चौधरी बताते हैं कि उन्होंने दूसरे देशों के शिक्षकों से भी जुड़ने का प्रयास किया है और वहां की तकनीकें भी अपने स्कूल में लागू की हैं, जिसमें एक है 'रहस्य कक्षा'... यह वो कक्षा है जिसमें हम अपने स्कूल के बच्चों को दूसरे देश के बच्चों के साथ ऑनलाइन जोड़ते है। दोनों कक्षाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं और दोनों कक्षाओं के बच्चे किसी दिए हुए टॉपिक जैसे-(कल्चर्ल एक्सचेंज) पर उस पर इंटरेक्शन करते है, वह बच्चे बातचीत करते हैं और दोनों कक्षाओं के टीचर फैसिलेटर का काम करते हैं। इसी के साथ उन्होंने बताया कि वह ICT के टूल्स को भी प्रयोग करते हैं।

 

भोला बताते हैं कि उनका सपना था कि वह अपने स्कूल को ट्रेन का रूप दें,  और उन्होंने अपने इस सपने को पूरा कर दिखाया। वह बताते हैं कि इस सपने को पूरा करने के लिए कई लोगों ने उनसे यह भी कहा कि ऐसा करने से कोई फायदा नहीं होगा, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि मेरे मन की इच्छा है, मेरे बच्चों की इच्छा है इसे पूरा जरूर करेंगे। इसी के साथ उन्होंने अपने स्कूल को प्राथमिक चांदपुर एक्सप्रेस शिक्षा वे का मूर्त रूप दे दिया। इसी के साथ एजुकेशन बीट्स से खास बातचीत में कपिल ने बताया कि वह अपने स्कूल के बच्चों को किस प्रकार अंग्रेजी बोलना सिखाते हैं... देखिए... जानें


 

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