Home Interview 230 साल से यहां पढ़ाई जा रही है संस्कृत, जानें कोरोना काल में क्या किया कमाल

230 साल से यहां पढ़ाई जा रही है संस्कृत, जानें कोरोना काल में क्या किया कमाल

EduBeats

वाराणसी/लखनऊ

लोग कहते हैं कि संस्कृत बोलने वाले तो पुराने ख्यालातों का समझा जाता है, हालांकि देश के 230 साल पुराने संस्कृत के विश्वविद्यालय संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजाराम शुक्ला  इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि आज विश्व समाज में एक नई जागरूकता आई है, संस्कृत को केवल पुरातन पंडितों की भाषा न मानते हुए आधुनिकतम तकनीकी और विज्ञान की भाषा भी मानी जाने लगी है। नासा जैसे क्षेत्र में भी या नासा जैसे संस्थाओं में भी वैदिक ज्ञान के ऊपर अनेक शोध कार्य हो रहे हैं। IIT हो य़ा IIM, सभी जगहों पर संस्कृत शिक्षण के अलग-अलग संकाय खुले हैं। संस्कृत शिक्षण के माध्यम से वे अपने वैज्ञानिक तकनीकी विज्ञान अनुसंधान को पुष्ट करना चाहते हैं। 

 

प्रो. शुक्ला कहते हैं कि विश्व में जितनी भी भाषाएं प्रचलित हैं वह सभी भाषाएं किसी न किसी रूप में संस्कृत से उद्धृत हैं इसलिए संस्कृत की प्राचीनता और प्रभुता में कोई संदेह नहीं है, वह जितनी प्राचीन है उतनी ही अद्यतन भी है। एजुकेशन बीट्स से बातचीत में उन्होंने बताया कि कोरोना की वजह से जब स्कूल कॉलेज बंद हुए तो उन्होंने अपने छात्रों से जुड़ने के लिए विशिष्ट तैयारी की। क्या थी ये खास तैयारी, जानने के लिए देखें पूरा इंटरव्यू...

 

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