Home News लखनऊः जुबिली इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल बोले, बच्चों पर अपनी मर्जी न थोपें अभिभावक

लखनऊः जुबिली इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल बोले, बच्चों पर अपनी मर्जी न थोपें अभिभावक

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की गड़बड़ियों की सूचना अक्सर आती रहती हैं लेकिन कुछ ऐसे भी स्कूल हैं जो मिसाल पेश करते हैं। इसके साथ ही अन्य स्कूलों के लिए संदेश भी होता है। ऐसा ही लखनऊ का जुबिली इंटर कॉलेज है। जुबिली इंटर कॉलेज में पढ़ाई से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक देखकर आप भी कहेंगे, ऐसा ही माहौल हर सरकारी कॉलेज का होना चाहिए। इन सब कामों के पीछे जुबली इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल सर्वदानंद का योगदान है। 2018 में कॉलेज के प्रिंसिपल के पद पर आने के बाद उन्होंने इस कॉलेज की बेहतरी के लिए बहुत से कदम उठाए। इन सब अच्छे काम को देखते हुए एजुकेशन बीट्स की स्थानीय संपादक दिव्या गौरव त्रिपाठी ने सर्वदानंद से बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख के अंशः  

 

प्रश्नः सरकारी विद्यालयों में लोग अपने बच्चों को क्यों नहीं पढ़ाना चाहते हैं?
उत्तरः
लोगों की यह सोच बन गई है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नही होती है, वहां की व्यवस्थाएं भी ठीक नहीं होती है। इसलिए लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में न पढ़ाकर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन हमने काम किया है, देखिए आज यहां अभिभावक खुद अपने बच्चों का एडमिशन कराना चाहते हैं।

 

प्रश्नः आपने जब से प्रिंसिपल का पदभार संभाला है तब से कॉलेज और बच्चों के लिए क्या कुछ किया है?
उत्तरः
1887 में बना जुबिली इंटर कॉलेज अवध क्षेत्र का सबसे पुराना कॉलेज है। यहां से पढ़े छात्रों ने भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपने अच्छे काम से नाम रोशन किया है। 2018 में जब मैंने इस कॉलेज में प्रिंसिपल का पद संभाला तब से यहां काफी कुछ सुधार हुआ है। मैंने यहां की कमियों को ध्यान में रखते हुए उनमें सुधार किया है और इस काम में कॉलेज के शिक्षकों का काफी सहयोग मिला है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के सुझाव से भी काम हुआ है। कॉलेज के पूर्व छात्र रहे प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कॉलेज के लिए बहुत कुछ किया है।

 

प्रश्नः आपके कॉलेज की पढ़ाई में (हिंदी या इंग्लिश मीडियम) ज्यादा फोकस किस पर किया जाता है?
उत्तरः
जुबिली इंटर कॉलेज पहला रेगुलर कॉलेज है। आज के समय में जो अधिकतर प्राइवेट स्कूल इंग्लिश मीडियम में शिफ्ट हो रहे हैं। इसलिए हमारा प्लान भी है कि अपने यहां इंग्लिश मीडियम चलाया जाए लेकिन अभी व्यवस्था नहीं हो पाई है। वैसे साइंस व कॉर्मस सब्जेक्ट की बात की जाए तो बड़ी कक्षाओं में हिंदी व इंग्लिश मीडियम दोनों तरह से पढ़ाया जाता है। जो बच्चे इंग्लिश मीडियम के हैं उन्हें इंग्लिश मीडियम में और जो बच्चे हिंदी मीडियम के है उन्हें हिन्दी मीडियम में पढ़ाया जाता है।

प्रश्नः हिन्दी मीडियम से 12वीं करने के बाद ग्रेजुएशन में छात्रों को अंग्रेजी के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस पर क्या कहेंगे?
उत्तरः
सिर्फ अंग्रेजी के पीछे नहीं भागना चाहिए और ऐसा जरूरी नहीं अंग्रेजी आती होगी तभी कुछ होगा। ये बात सही है कि साइंस या इंजीनियरिंग क्षेत्र में अधिकांश किताबें अंग्रेजी में ही होती हैं। वहीं, अब कई यूनिवर्सिटीज हिन्दी मीडियम से पढ़ा रही हैं। इसके अलावा वह कई लेखकों से अपने विषय के पेपर हिन्दी में ही तैयार करवाती हैं।

 

प्रश्नः ऐसा देखा जा रहा है बच्चे अपनी प्रतिभाओं को भूल रहे हैं। वहीं, बच्चों की रुचि को न देखते हुए अभिभावक मर्जी थोपते हैं। इसको लेकर आपकी राय?
उत्तरः
अभिभावकों से मेरा यही कहना है कि सबसे पहले अपने बच्चों की इच्छाओं को जानकारी करें। इसके साथ ही यह जानने की कोशिश करें कि बच्चों की रुचि किस विषय में है। बच्चा जिस क्षेत्र में आगे जा सकता है, उसका सहयोग करें और अपनी मर्जी बच्चों पर न थोपें।  

 

प्रश्नः आपके द्वारा कॉलेज में किए गए कार्यों के बारे में बताएं
1. पिछले साल से हम लोगों ने प्री-बोर्ड परीक्षा शुरू की तो पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू हो गई।
2. इस विद्यालय में छात्र सम्मेलन (एलुमिनाई मीट) कराई जो सरकारी स्कूलों में नहीं होती है।
3. कॉलेज में साइंस लैब बनाया गया है, जिससे जिले के छात्रों को इसका लाभ मिल रहा है।
4. कॉलेज की वेबसाइट बनाई गई है। यहां पर आपको सभी जानकारी मिल जाएगी।
5- टॉयलेट की व्यवस्था पर विशेष रूप से फोकस किया गया।

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