Home Interview अनाथों के नाथ हैं सागर रेड्डी, जानें ABVP के युवा पुरस्कार विजेता के बारे में सबकुछ

अनाथों के नाथ हैं सागर रेड्डी, जानें ABVP के युवा पुरस्कार विजेता के बारे में सबकुछ

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नई दिल्ली/मुंबई
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के द्वारा दिए जाने वाला 'प्रो. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार इस बार (2019) महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता सागर रेड्डी को दिया जाएगा। अनाथों की देखभाल करने वाले सागर रेड्डी की जिंदगी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। सागर रेड्डी अनाथों की देखभाल करते हैं। सागर रेड्डी ने जैसा एजुकेशन बीट्स की टीम को बताया...

 

बताते चलें कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे अनाथालयों के नियम के अनुसार, अनाथालयों में रहने वाले बच्चों की देखभाल 18 वर्ष की उम्र तक ही की जा सकती है। इसके बाद उन्हें वहां से निकाल दिया जाता है और यह मान लिया जाता है कि 18 वर्ष में बच्चे अपनी जिम्मेदारी समझ सकता है। वहीं, इस समय वह स्थिति होती है कि जब बच्चे को संस्था और समाज की सबसे ज्यादा जरुरत होती है। यहां पर भटकाव के चलते ही बच्चे अपराध की दुनिया में पहुंच जाते हैं। 

 

अनाथों की देखभाल करने वाले सागर रेड्डी ने एक साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उनका बचपन अनाथालय में बीता। सागर रेड्डी पढ़ने में काफी अच्छे थे लेकिन नियमानुार तय समय के बाद उन्हें अनाथालय से निकाल दिया गया। यहां से निकलने के बाद उनके मन में कई तरह के विचार आए, इसमें आत्महत्या करना भी शामिल था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सागर रेड्डी सपनों के शहर मुंबई पहुंच गए।

 

 

मुंबई में सागर रेड्डी दो चार साल जीवनयापन के लिए कुछ न कुछ करते रहे। यहां पर एक व्यक्ति ने सागर रेड्डी की काफी मदद की और उन्होंने चेंबूर में स्वामी विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद एलटी में अभियंता की नौकरी कर ली लेकिन होनी को कुछ और ही थी। नौकरी के दौरान अनाथालय पहुंचे सागर रेड्डी को एहसास हुआ कि यहां से निकलने वाले बच्चों का क्या होगा? इसके बाद से ही उन्होंने अनाथ बच्चों के माता-पिता बनने का निर्णय कर लिया।     

 

भायखला के पठान चाल में किराए के कमरों में 72 अनाथ बच्चों से शुरू हुआ सागर रेड्डी का यह नेक काम आज औरंगाबाद, बंगलुरू, हुबली, रायचूर, हैदराबाद आदि स्थानों पर हो रहा है। सागर रेड्डी की संस्था ने अबतक 1125 अनाथ बच्चों को आत्मनिर्भर, 700 अनाथ बच्चों को नौकरी योग्य और 60 से अधिक युवतियों का कन्यादान किया है।

 

अनाथों को महाराष्ट्र सरकार से दिलावाया आरक्षण

आज भी 'निराधार एकता संघ' में 600 से अधिक अनाथ बच्चे अपना जीवन संवार रहे हैं। सागर रेड्डी के अथक प्रयासों के बाद 17 जनवरी, 2018 को महाराष्ट्र सरकार ने अनाथ बच्चों के लिए सरकारी नौकरी में 1 फीसदी आरक्षण की घोषणा की।  

 

बता दें कि आगरा में 22 से 25 नवंबर तक होने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन में सागर रेड्डी को यह पुरस्कार दिया जाएगा। इस पुरस्कार के तहत 1 लाख रुपये की राशि, प्रमाणपत्र और स्मृतिचिन्ह दिया जाता है।

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