Home Interview एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: सफाई से लेकर भ्रष्टाचार तक, हर मुद्दे पर खुलकर बोले लविवि कुलपति

एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: सफाई से लेकर भ्रष्टाचार तक, हर मुद्दे पर खुलकर बोले लविवि कुलपति

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लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बंधित कॉलेजों में विभिन्न प्रकार की समस्याएं देखने को मिलती हैं, जिनमें सबसे बड़ी समस्या के रूप में भ्रष्टाचार को देखा जाता है। हाल ही में एजुकेशन बीट्स की टीम ने विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों में चल रहे भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए एक बड़ा स्टिंग ऑपेरशन किया, जिसने लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रशासन पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भी कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। इसी विषय पर एजुकेशन बीट्स की रेजिडेंट एडिटर दिव्या गौरव त्रिपाठी और रिपोर्टर पूर्ति सिंह की लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एस. पी. सिंह से हुई खास बातचीत के कुछ अंश- 

 

1- पिछले साल आपने विश्वविद्यालय में सेमेस्टर सिस्टम शुरू किया था, जिसका उस वक़्त काफी विरोध हुआ लेकिन क्या आपको ऐसा लग रहा है कि इतना समय बीतने के बाद अब चीजें ट्रैक पर आ गई है?

बहुत सारी चीजें होती हैं, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती है। इसके बारे में आगे क्या परिणाम होना है, ये उनका विजन नहीं होता है और जब एक रास्ते पर हम चलते रहते है तो उस रास्ते पर चलने के हम आदी हो जाते हैं साथ ही उसमें जो कमियां रहती हैं, उन्हें भी स्वीकारने के आदी हो जाते हैं लेकिन उसका परिवर्तन हम स्वीकार नहीं करते। विश्वविद्यालय में जो एनुअल सिस्टम है यह आज से 40 साल पहले हटा दिया गया था। विदेशों से और देश के अच्छे विश्वविद्यालयों से भी हटा दिया गया है लेकिन ये कुछ अव्यवस्थित विश्वविद्यालय जो पुराने ढंग से चल रहे थे इनमें सहूलियत व्यवस्थाओं को मिल रही थी, टीचर्स व विद्यार्थियों को सहूलियत मिल रही थी, जिसके कारण ये सभी उसके आदी हो गए थे। अब यह समझना मुश्किल है कि विश्वविद्यालय में शुरू हुए इस सेमेस्टर सिस्टम का विरोध कौन कर रहा था? यह विरोध विद्यार्थियों ने किया, शिक्षकों ने किया या व्यवस्था बनाने वालों ने किया इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं होगा। सेमेस्टर सिस्टम की शुरुआत करना बहुत आवश्यक था और जब मैंने इसका निर्णय लिया तो मुझे इस बात का आभास हुआ कि विरोध ऐसा कुछ हो सकता है और अंत में ऐसा ही हुआ लेकिन कुछ समय बाद परीक्षा हुई और उस परीक्षा का परिणाम आया तो उस परिणाम को मैंने मीडिया के साथ शेयर किया, कि देखिए 6 महीने की पढ़ाई का और उसके बाद हुई परीक्षाओं का कितना फायदा हुआ है, स्टूडेंट्स को कितना फायदा हुआ है तो पहले जिन छात्रों के द्वारा विरोध हुआ था, उन्हीं छात्रों के साथ ही मीडिया ने इस काम को ऐप्रिशिएट किया। हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान के बाहर जो लीडिंग रोल हैं वे इस काम को कर रहे हैं। अगर हमें वहां पहुँचना है, उस मानक तक जाना है तो उनके परिवर्तनों को स्वीकार करना पड़ेगा यह कार्य समाज के साथ व्यापक विश्वविद्यालय के हित में है। 


 

2- विश्वविद्यालय में आने के बाद आपने क्या किया, जिससे प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों को प्रेरणा मिल सके?

मैं विश्वविद्यालय का कुलपति हूं तो मेरा उद्देश्य इसकी छवि को बनाना है और विश्वविद्यालय जिसके लिए बना है, उसके संरक्षण की रक्षा करना है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के लिए है। विश्वविद्यालय का स्वरूप विद्यार्थियों के स्वरूप के हित में होना चाहिए। उसके बाद किसी और का होना चाहिए। अभी तक विश्वविद्यालय में ऐसा ही होता रहा है कि विश्वविद्यालय स्थापित रहा और कर्मचारियों के साथ अध्यापकों को प्राथमिकता देता रहा, जहां विद्यार्थी पिछली कतार में खड़े रहे। हमने उन्हीं विद्यार्थियों को पहली कतार में ला कर खड़ा कर दिया।

 

3- आपके विश्वविद्यालय के हॉस्टल्स की कई समस्याएं सामने आती रहती हैं जैसे पानी से लेकर शौचालय तक। जिस पर कुछ समय पहले चंद छात्रों ने व्यवस्थाओं के लिए भीख मांग कर विरोध जाहिर किया था। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

यह बात सौ फीसदी झूठ है क्योंकि जिन विद्यार्थियों ने यह आवाज उठाई थी, वे न तो हॉस्टल में रहते हैं और न ही विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं फिर भी यहां की व्यवस्था तथा पेयजल जैसी समस्या से उनका क्या सरोकार है? यह समझ में नहीं आता। यह समस्याएं तो उन्हें महसूस होंगी जो हॉस्टल में रह रहे हैं। यहां का इमिडिएट अधिकारी वहां का प्रोवोस्ट है। होस्टल में समस्या की शिकायत न ही किसी ने प्रोवोस्ट को की, न एचओडी से और न ही किसी डीन से की क्योंकि ये एक प्रकार का षड्यंत्र था। उन्हें मीडिया में आना था, उन्हें अपनी राजनीति करनी थी। मेरे पास पूरा लेखा-जोखा है कि कितने वाटर-कूलर कहाँ लगे हैं? सभी शौचालय व्यवस्थित हैं और पेयजल की उचित व्यवस्था छात्रों को दी जा रही है। साथ ही हॉस्टल में जितनी भी व्यवस्थाएं हैं सभी कार्यशील हैं। प्रदर्शन करने वाले जो भी लोग थे, वे सभी एक पर्टिकुलर राजनीतिक पार्टी से जुड़े थे। उन्हें एक मंच चाहिए था, जो प्रदर्शन के माध्यम से मिल गया।


 

4- कई छात्र ऐसे होते हैं, जो विश्वविद्यालय में एडमिशन तो लेना चाहते हैं लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण एडमिशन नहीं ले पाते। ऐसे छात्रों के लिए विश्वविद्यालय क्या सुविधा उपलब्ध करा रहा है? 

विश्वविद्यालय में प्रवेश का आधार निर्धनता नहीं है। विश्वविद्यालय में प्रवेश का आधार प्रवेश परीक्षा है। हमारे पास यदि 40 सीटें हैं और 400 बच्चे उसमें आवेदन कर रहे हैं तो जो छात्र प्रवेश परीक्षा को पास कर करेंगे, उनका एडमिशन होगा। प्रवेश परीक्षा ट्रांसपेरेंट होती है। जो परीक्षा को क्वालीफाई करेगा, उनका ही एडमिशन होगा। लखनऊ विश्वविद्यालय की फीस जूनियर हाईस्कूल से भी कम है। जो निर्धन बच्चे यहां आकर परीक्षा को क्वालीफाई करते हैं तो उनमें से तीन बच्चों को सरकार स्कॉलरशिप देती है। इतना ही नहीं, जिनकी सलाना आय एक लाख से कम है उनके बच्चों को सरकार फीस देकर पढ़ाती है तो इनमें निर्धनता कहीं से भी बीच में नहीं आ रही है। हमारा आधार गरीबी नहीं, योग्यता है।

 

5- लखनऊ विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव बंद है। इसे आप किस नजर से देखते हैं, चुनाव होने चाहिए या नहीं?

छात्र संघ का चुनाव एक व्यवस्था है उसके होने न होने से विश्वविद्यालय के शासन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि मेरे लिए दोनों का उद्देश्य एक ही हैं। मेरे लिए छात्र कल्याण सर्वोपरि है इसीलिए मैं लोगों से मिलता हूं और बात करता हूं। जो कार्य होने के लायक होते हैं, वे होते हैं और जो व्यवस्था के खिलाफ होते हैं, वे नहीं होते। हम नियमों की रक्षा के लिए हैं और नियमों की रक्षा तब होगी, जब व्यक्ति की रक्षा होगी लेकिन जहां व्यक्ति नियम तोड़ता है, वहां किसी की रक्षा नहीं हो पाती। दूसरी बात छात्र संघ का मामला उच्च न्यायालय में पेंडिंग है जो कि कोई छात्र ले गया था तो विश्वविद्यालय के चुनाव पर मेरी तरफ से न तो कोई रोक है न कोई प्रारंभ है।


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6- सोशल मीडिया का समय है। क्या आपको नहीं लगता कि लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ यहां के प्रशासन को भी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना चाहिए?

विश्वविद्यालय और छात्र अपने-अपने ढंग से एक्टिव हैं। इसकी वेबसाइट के साथ-साथ ट्विटर हैंडल भी एक्टिव रहता है लेकिन दिक्कत है कि यह मीडिया तंत्र अपने ढंग से दिखाता है। मीडिया के पास बहुत ताकत है। किसी मुद्दे को कितना बड़ा और एक्सक्लूसिव बना सकते हैं, यह मीडिया को पता है। कुछ जिम्मेदारी कुर्सी पर बैठा अकेला आदमी नहीं निभा सकता, उन जिम्मेदारियों को आपके साथ पूरे समाज और मीडिया को भी निभाना होगा।


 

7- अभी हाल ही में एजुकेशन बीट्स की टीम ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया है। लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेजों में बड़े लेवल पर भ्रष्टाचार हो रहा है। क्या इस पर विश्वविद्यालय की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है जो वह ऐसे भ्रष्टाचार करने वाले कॉलेजों पर नजर रखे?

 इस तरह की हरकत को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए जो भी बेहतर से बेहतर तरीका अपनाना होगा, हम जरूर अपनाएंगे। 


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8- विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कुछ कॉलेजों में अभी भी एडमिशन हो रहे हैं, जिसके साथ 75% उपस्थिति देने का भी दावा किया जा रहा है। अब आप बताइए कि इतनी देरी से एडमिशन होने के बाद भी 75% उपस्थिति किस प्रकार मिल सकती है?

मेरी नोटिस में सारे एडमिशन पहले ही हो चुके हैं लेकिन यदि अब भी एडमिशन हो रहे हैं तो इसके लिए जो कार्रवाई बन सकती है, वह कार्रवाई ऐसे लोगों पर की जाएगी। मैं आपसे इतना और कहना चाहूंगा कि जो शिक्षक बड़ा-बड़ा वेतन ले रहे हैं और कक्षा में पढ़ाने के लिए उपस्थित नहीं हो रहे हैं, ऐसे लोगों को भी बेनकाब करिए जिससे उन पर भी कार्रवाई हो सके।


 

9- क्या स्टिंग के दौरान भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए कॉलेजों पर कार्रवाई होगी?
आप बेफिक्र रहें, सौ फिसदी जांच होगी और जांच के दौरान भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई भी होगी। अधिक आवश्यकता पड़ी तो ऐसे कॉलेज को बंद भी कराया जाएगा।


 

10- स्टिंग ऑपरेशन करने के बाद एक बात तो साफ है कि भ्रष्टाचार करने वाले कॉलेजों में डर नाम की कोई चीज नहीं रह गई है तो आप इसे किस नजर से देखते हैं? डर न होने का कारण विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही है या इसकी कोई अन्य वजह है?

देखिए, हमारे देश में हर अपराध के लिए कानून बना होता है लेकिन फिर भी लोग अपराध करते हैं, कानून के हिसाब से सजा भी मिलती है, फांसी तक दी जाती है फिर भी लोग उसी अपराध को करने से बाज नहीं आते हैं। कुछ लोगों के अंदर विश्वविद्यालय और कानून का भय तो है लेकिन जब कोई अपराध या चोरी करते हैं तो वह भी खत्म हो जाता है। आप निश्चिन्त रहें, इन कॉलेजों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
 

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