Home Interview पिछली सरकारों के कारण रुका उर्दू भाषा का विकास, वर्तमान सरकार दे रही विशेष ध्यान: दानिश आजाद

पिछली सरकारों के कारण रुका उर्दू भाषा का विकास, वर्तमान सरकार दे रही विशेष ध्यान: दानिश आजाद

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हम सभी जानते हैं कि आज भारत देश का आधार यहां की भाषाएं हैं क्योंकि भाषाओं के ही माध्यम से हम एक-दूसरे से जुड़ते हैं, एक-दूसरे को समझते हैं। इतना ही नहीं, हमारा जीवन भी इन्हीं भाषाओं पर टिका होता है। इन्हीं भाषाओं की सूची में कुछ भाषाएं ऐसी होती हैं जिनका समाज में बहुत महत्व होता है, इसके बावजूद न उनका विकास होता है और न ही उनके विकास पर कोई ध्यान देता है। ऐसी ही भाषाओं में एक भाषा आती है उर्दू। जो विकास के अभाव के चलते  अधिकतर लोगों के जेहन में तो होती है लेकिन जुबा पर नहीं आ पाती। इसी उर्दू भाषा से जुड़े हुए कई विषयों पर उत्तर प्रदेश सरकार के फखरुद्दीन अली अहमद आयोग, भाषा मंत्रालय के सदस्य दानिश आजाद से हुई एजुकेशन बीट्स की रिपोर्टर सना हुसैन और पूर्ति सिंह की खास बातचीत-


1. उर्दू भाषा को मुस्लिमों में एक अहम दर्जा दिया गया है, फिर भी यह भाषा अब धीरे-धीरे धुंधली होती जा रही है, ऐसा क्यों?

उर्दू भाषा पर पिछली सरकारों ने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया लेकिन वर्तमान समय में केंद्र और राज्य सरकार सभी भाषाओं और धर्मों पर विशेष ध्यान देते हुए एक साथ लेकर चल रही है। यहीं अगर उर्दू भाषा की बात करें तो इसके लिए केंद्र सरकार के द्वारा कई योजनाएं लाई गयी थी लेकिन पिछली राज्य सरकार की उदासीनता के कारण उन योजनाओं को धरातल पर उतरने का मौका नहीं मिल सका। मुझे जब राज्य भाषा समिति का सदस्य बनाया गया, तब यह समिति निष्क्रिय थी और ऐसी ही तमाम समितियां भी निष्क्रिय थीं, जो अलग-अलग भाषाओं की थीं। उसके बाद उन सभी समितियों को सक्रिय करते हुए प्रदेश की योगी सरकार द्वारा उनके सदस्यों को भी नामित किया गया। माननीय योगी जी से हमारी मीटिंग हुई, जिसमें उन्होंने सभी समितियों के सदस्यों को निर्देश देते हुए यह कहा कि सदस्य उर्दू समिति का हो, संस्कृत समिति का हो या किसी अन्य भाषा से जुड़ी हुई समिति का। सभी को अपने आयोग के कार्यों को ईमानदारी से करते हुए अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को आम जनता तक पहुंचाना है। योगी सरकार उर्दू भाषा पर विशेष रूप से ध्यान दे रही है। अभी हाल ही में उर्दू भाषा समिति के द्वारा ऐसे साहित्यकारों को सम्मानित किया गया जो उर्दू भाषा से जुड़े हुए हैं, उर्दू भाषा के उत्थान में जिनका योगदान है। साथ ही उर्दू भाषा के अनेकों गजल लेखक भी हैं, जिन्हें सरकार की तरफ से सुविधाएं मिल रहीं हैं। जो बच्चे उर्दू भाषा से पी.एच.डी. कर रहे हैं या कर चुके हैं, उन्हें राज्य सरकार द्वारा गोल्ड मेडल देने का प्रावधान था। जिसके चलते ऐसे छात्रों को पिछले वर्ष के साथ इस वर्ष भी सम्मानित किया गया। ऐसी बहुत सी योजनाएं है, जो राज्य सरकार बड़ी गम्भीरता से उर्दू भाषा के लिए कर रही है।

 

 

2. उर्दू भाषा की तरक्की के लिए अकादमी की तरफ से क्या योजनाएं है?

उत्तर प्रदेश के अंदर उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए यदि  कोई संगोष्ठी जैसा आयोजन करता है तो ऐसे आयोजन के लिए अकादमी या राज्य भाषा समिति के द्वारा लगभग 1 लाख रुपए दिए जाते हैं। अगर कोई संस्था मुशायरा या उर्दू से संबंधित कार्यक्रम कराती है तो उस संस्था के लिए भी 3 से 4 लाख रुपए का बजट प्रदेश सरकार द्वारा एलॉट किया जाता है। प्रदेश के किसी भी शहर में उर्दू पर लिखे गए नाटक किए जाते हैं तो उसके लिए भी फंड दिया जाता है। 

 

 

3. उर्दू भाषा की तालीम को बेहतर करने के लिए आने वाले वक्त में क्या प्रयास हो रहे हैं?

सभी भाषाओं की तरह उर्दू भाषा भी बहुत अच्छी भाषा है, इसलिए उर्दू भाषा को कॉमन करने तथा एक आम भाषा बनाने के लिए हमारी समिति की ओर से प्रदेश के सभी शहरों में, वहां के मुख्य-मुख्य स्कूलों में उर्दू, हिंदी और संस्कृत के लिए एक लैंग्वेज लैब डेवलप किया जाएगा। जिसके माध्यम से स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चे अपनी सुविधानुसार भाषा का चयन करके अपने रुचि को और अधिक बढ़ा पाएंगे।

 

 

 

 

4. उर्दू भाषा के अल्फाजों से गंगा-जमुनी तहजीब कायम है, इसके बावजूद इसकी हालत कमजोर क्यों हो गई?

इसका मुख्य कारण उत्तर प्रदेश की पिछली सरकारें हैं क्योंकि सपा और बसपा दोनों सरकारें प्रदेश के अल्पसंख्यकों के शुभ-चिंतक  तो बने रहते थे लेकिन जो जमीनी स्तर पर उनके लिए काम करना चाहिए, वह नहीं करते थे। सच कहूं तो वे केवल वोट बैंक की राजनीति तक ही अल्पसंख्यकों को सीमित रखते थे। लेकिन वर्तमान सरकार इन पर विशेष ध्यान दे रही है। अल्पसंख्यकों के लिए तमाम ऐसी योजनाएं चला रही है, जिससे उन्हें फायदा मिल सके। इसके उदाहरण के लिए, मदरसों के अधुनिकीकरण को आप देख सकती हैं क्योंकि वहां अभी तक उर्दू और अरबी में पढ़ाया जाता था लेकिन अब वहां एनसीईआरटी की पुस्तकों को लाया जा रहा है। जिससे इस्लामी शिक्षा के साथ वहां के बच्चे सांइस, कम्प्यूटर और गणित जैसे सभी विषयों का अध्यन करने के साथ देश की तरक्की में सकारात्मक भूमिका निभा पाएंगे। 

 

 

5. आपने जनवरी 2018 को पदभार सभाला था। तब से आज तक कौन सा ऐसा कार्य किया, जिससे आपको दिली सुकून मिला हो?

जनवरी से हमारे द्वारा जितने भी कार्य हुए उनमें सरकार के जो इरादे थे, उन्हें हम जमीनी स्तर पर ले कर आए। बाकी सरकार द्वारा जो दायित्व मिला, उसका पालन अभी तक पूरी ईमानदारी और निष्ठा से कर रहा हूँ। यही मेरे लिए दिली सुकून की बात है। सरकार द्वारा जो योजनाएं चलाई जा रहीं थी, शुरुआत में उनकी जानकारी जमीनी स्तर पर लोगों को बहुत कम थी। छात्रों को भी स्कॉलर जैसी अनेक योजनाओं के बारें नहीं पता था, जिससे वह लाभ से वंचित रह जाते थे। आज हम लोग मिलजुल कर सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीमों की जानकारी जनमानस तक पहुंचा रहे हैं। जिससे ज्यादा से ज्यादा योग्य व्यक्ति इसका लाभ ले रहा है।

 

 

6. एजुकेशन बीट्स के लिए शुभकामनाओं सहित आप क्या संदेश देना चाहते हैं?

एजुकेशन बीट्स शिक्षा के क्षेत्र में पूर्ण रूप से कार्य करने वाला पहला न्यूज पोर्टल है। वास्तव में, इस बात की मुझे बहुत खुशी है क्योंकि  जो सिर्फ शिक्षा पर आधारित हो ऐसा चैनल प्रदेश के युवाओं के बीच आने की आवश्यकता थी। इससे पहले भी शिक्षा से सम्बन्धित खबरें कवर की जाती थीं, लेकिन उस समय शिक्षा को सिर्फ एक छोटे से पार्ट के रूप में कवर किया जाता था। अब एजुकेशन बीट्स के माध्यम से शिक्षा पर मेन फोकस किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ऐसे कार्य है, जिन्हें सुधारने की जरूरत है, और आप प्रयासरत भी हैं। आपके चैनल के द्वारा जो सूचनाएं और सुझाव आएंगे, उस पर हम और हमारी सरकार गम्भीरता से विचार करेगी और सकारात्मक कदम भी उठाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि एजुकेशन बीट्स युवाओं द्वारा शुरू किया गया और युवाओं के लिए शुरू किया गया न्यूज पोर्टल है। आज देश में युवाओं का बोलबाला है, देश की 60% आबादी युवाओं की है। निश्चित ही हम और आप जैसे युवा देश की तकदीर लिखने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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