Home News कॉलेज ने किया था एडमिशन कैंसिल, इस महिला के संघर्ष ने बचाया बच्चियों का भविष्य

कॉलेज ने किया था एडमिशन कैंसिल, इस महिला के संघर्ष ने बचाया बच्चियों का भविष्य

बांदा
'बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ' के नारे की धज्जियां कितनी बुरी तरह से उड़ाई जा रही हैं, इसकी बानगी उत्तर प्रदेश के बांदा में तब देखने को मिली जब एक कॉलेज में छात्राओं का एडमिशन ही कैंसिल कर दिया गया। बच्चियां एडीएम से लेकर डीएम ऑफिस, कॉलेज से लेकर कुलपति तक के चक्कर लगाती रहीं, लेकिन किसी ने उनके भविष्य का ख्याल नहीं किया। वह तो भला हो राज्य महिला आयोग की सदस्या प्रभा गुप्ता का, जिन्होंने मामले का संज्ञान लेते हुए गंभीरता से मामले को राज्ययपाल तक पहुंचाया और आखिरकार बच्चियों को न्याय मिला।

 

उत्तर प्रदेश के बांदा में पंडित जवाहरलाल नेहरू डिग्री कॉलेज में दो छात्राएं आरजू गुप्ता और जीतू गुप्ता ने बीए प्रथम वर्ष में नियमानुसार शुल्क जमा कर दाखिला लिया था। दो माह तक दोनों छात्राओं ने कक्षाएं भी की थी, लेकिन अक्टूबर माह के आरंभ में कॉलेज प्रशासन ने उनका दाखिला निरस्त कर कॉलेज में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इससे क्षुब्ध छात्राओं ने 17 अक्टूबर से एक सप्ताह तक जिला मुख्यालय के अशोक लॉट तिराहे पर अनशन किया था।

 

 राज्य महिला आयोग की सदस्या तथा समाजसेवी प्रभा गुप्ता को मामले की जानकारी हुई तो पहले उन्होंने एडीएम, डीएम और कुलपति से बात की लेकिन किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होते देख उन्होंने छात्राओं की पीड़ा से महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को अवगत कराया। गुप्ता ने बताया कि राज्यपाल के हस्ताक्षेप के बाद कॉलेज प्रशासन ने दोनों छात्राओं को पुन: दाखिला दे दिया है और वे अब नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में अध्ययन कर रही हैं।

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एडिटर की बात
मामला हैरान करने वाला है। हालांकि आरजू गुप्ता और जीतू गुप्ता को न्याय तो मिल गया लेकिन सोचने वाला विषय है कि जिनको प्रभा गुप्ता जैसे लोग नहीं मिलते, वे क्या करते होंगे? इस तरह से प्रशासन कैसे दो छात्राओं के अनशन को नजरअंदाज कर सकता है। एजुकेशन बीट्स मांग करता है कि इस मामले की जांच कराई जाए, तथा उन सभी लोगों को सजा दी जाए, जिन्होंने बच्चियों का साल और पैसा बर्बाद करने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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