Home Blogs जंग जब भी लडे़ तुम तो हारे नहीं, बात सीधी कहे कुछ संवारे नहीं

जंग जब भी लडे़ तुम तो हारे नहीं, बात सीधी कहे कुछ संवारे नहीं

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हाथ देकर कभी तुम भुलाते नहीं,
बात कहकर कभी तुम सताते नहीं।
जिंदगी की कड़ी में दिखे तुम जिधर,
गम को अपने किसी से बताते नहीं ।।

 

बात आई गई तुम तो बदले नहीं,
दूर रहकर भी नजरों से फिसले नहीं।
बात अनबन की तुम तो भुलाते रहे,
यूं तो दर्दों में हंसते थे पहले नहीं।।

 

जंग जब भी लडे़ तुम तो हारे नहीं,
बात सीधी कहे कुछ संवारे नहीं।
आज हालात ऐसे तो कैसे हुए,
दुश्मनी में भी उनको निहारे नहीं।।

 

डॉ गौरव त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर
मीरजापुर 

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