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भैया तुम राखी पर आना, ये अरमान सजा कर रखा है

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iनेह प्रीति के धागों का, इक गुलदान सजा कर रखा है। 
भैया तुम राखी पर आना, ये अरमान सजाकर रखा है।। 


रक्षा का बचन निभाना तुम,
सरहद से दुश्मन भगाना तुम। 
हिम्मत, संबल, हो मेरे भैया,
तनिक नहीं घबराना तुम।। 


तूफ़ाँ में भी हिम्मत,साहस का, दीप जला कर रखा है। 
भैया तुम राखी पर आना,ये अरमान सजाकर रखा है।। 


किसी की चूडी,किसी बिंदी,
और मंगलसूत्र राह देखते है। 
भरी माँग,ये महावर, झूमके,
नित प्रियतम की बाट जोहते हैं।। 


आने की उम्मीदों ने जिज्ञासा का अर्घ्य चढ़ाकर रखा है। 
भैया तुम राखी पर आना, ये अरमान सजा कर रखा है।। 


मिलन जुदाई के वो लम्हें,
वो जाने कैसे सहती होगी। 
छोड़ के तुम गए युद्ध को,
और वो कैसे रहती होगी।। 


उसने आँसू चादर और यादों का हार पहन कर रखा है। 
भैया तुम राखी पर आना, ये अरमान सजाकर रखा है।। 


दिया प्रेम का जल के कहता, 
अपनी करुण कहानी हरदम। 
मां की आस साँस हो तुम ही, 
पिता का बल और दम ख़म।। 

 

सोते जागते माँ बाबूजी ने भी ईमान जगा कर रखा है। 
भैया तुम आना राखी पे, ये अरमान सजा कर रखा है।। 

 

जीतो जंग सफल हो जाओ,
दुश्मन को तुम मार भगाओ।
है रक्षा का वादा तुमसे भैया,
अपने देश की लाज़ बचाओ।। 

 

मैंने भाई तेरे नाम का, स्व अभिमान बचा कर रखा है। 
भैया तुम राखी पर आना ये अरमान सजाकर रखा है।। 

करन त्रिपाठी
हरदोई, उत्तर प्रदेश

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