Home Blogs खुशहाली का बसेरा देख, इंतजार ने दम तोड़ दिया है

खुशहाली का बसेरा देख, इंतजार ने दम तोड़ दिया है

EduBeats

आज सूर्य में वो तेज नहीं,
हवाओं में चंचलता नहीं,
आब में शीतलता नहीं,
भाप ले रही सिसकारियां,
ओस ले रही अंगड़ाइयां।

 

ये नवयुग निर्भया है,
ये नवयुग निर्भया है।


चतुर्दिक नितांत अंधकार है,
मनुष्य मांग रहा अधिकार है,
ये साम्य जो प्रतीत हो रहा,
खोटा अनुबंध है,
ये समाज का एक दंभ है।


ये नवयुग निर्भया है,
ये नवयुग निर्भया है।


तू खो गया है या खो रहा है,
ये बता क्या खोज रहा है,
है क्या इस घनघोर बियाबान में ,
क्यों हो रहा निर्लिप्त है,
निर्लिप्तता का भी क्या कोई औचित्य है।


ये नवयुग निर्भया है,
ये नवयुग निर्भया है।


तू जाग नया सवेरा देख,
खुशहाली का बसेरा देख,
इंतजार ने दम तोड़ दिया है,
तारीखों ने भी मुख मोख मोड़ लिया है,
न्याय दरवाजे पर डटा खड़ा है,


ये नवयुग निर्भया है,
ये नवयुग निर्भया है।

 

प्रिया सिंह

गौतम बुद्ध नगर, नॉएडा

डिस्क्लेमर:
हम अपने रचनाकारों से अपेक्षा करते हैं कि इस सेक्शन में प्रकाशित करने के लिए वे जो भी रचनाएं हमें भेजते हैं, वे उनकी मौलिक रचनाएं होती हैं। हालांकि हम उसे क्रॉस वेरीफाई करते हैं फिर भी यदि कोई विवाद होता है तो आप हमें हमारे हेल्पलाइन नम्बर 08874444035 पर बता सकते हैं। सभी विवादों का न्याय क्षेत्र लखनऊ होगा।

RELATED NEWS

ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT