Home Blogs सरकार भी नहीं देती पूरे कार्यकाल में इतने जवाब

सरकार भी नहीं देती पूरे कार्यकाल में इतने जवाब

EduBeats

मेरे पेशे का सम्मान आज भी उतना ही है जितना एक सीमा पर रक्षा करने वाले एक शूरवीर जवान का है। मैं हर रोज नए मानकों पर परखा जाता हूँ। जितने सवालों के जवाब सरकारें पूरे कार्यकाल में नहीं देती उतने जवाब मैं रोज देता हूँ। मुझसे सवाल पूछने पर मैं अनदेखा नहीं कर सकता, मुझे जवाब देना ही पड़ता है और सही जवाब ही देना पड़ता है। 

 

हर रोज मेरी परीक्षा होती है, मेरी प्रतिष्ठा हर रोज दांव पर होती है, मुझे परखे जाने के जितने मापदंड हैं उतने शायद किसी को परखे जाने के नहीं। मैं जी हां मैं एक प्राइवेट शिक्षक हूँ। मैं सबके लिए जवाबदेह हूँ, अभिवावक हो या बच्चे हो, प्रिंसिपल हो या डायरेक्टर हो, या कोई मैनेजमेंट वाले हो सब सवाल मेरी तरफ होते हैं। 


जब बच्चों के टेस्ट लें तो बच्चों से ज्यादा मुझे टेंशन होती है, कि नम्बर कम आएंगे तो मैनेजमेंट को क्या बताऊंगा? बच्चे खुद के रिजल्ट के लिए दुआ करें या न करेें पर प्राइवेट शिक्षक को बच्चों के अच्छे परिणाम के लिए दुआएं रोज करनी पड़ती है। रिजल्ट वाले दिन बच्चों और उनके शिक्षकों की धड़कने राग मिलाती हैैं। 


खैर परीक्षा तो हमारी रोज ही होती है कभी एंटरटेनर बनकर, कभी धमका कर, कभी समझाकर तो कभी- कभी जोकर की तरह हंसाकर बस इस कोशिश में रहते हैं कि बच्चे अच्छे से सब समझ जाए बस। 


आजकल हमारा सम्मान कम होने लगा है, लेकिन इस लॉकडाउन काल ने हमें सोचने को मजबूर कर दिया है। न हम बीपीएल वाले हैं, न ही खाद्य सुरक्षा में हमने नाम लिखवाया, क्योंकि हम स्वयं समाज के आदर्श हैं, गरीबो की योजना का फायदा गरीबो को मिले तो ही ठीक, हम स्वस्थ है न, कमा सकते हैं फिर सरकार और देश पर बोझ क्यों बने? इसलिए बड़े बड़े सपनो को लिए हुए, इन छोटे मोटे चक्करों में हम पड़ते ही नहीं। 

 

आजतक हमने बस जवाब ही दिए हैं, सवाल किसी से नहीं पूछा आज पूछते हैं सरकार बड़े उद्योगपतियो के लिए ही है क्या? मैं  दावे से कह सकता हूँ कि इस देश में सबसे ज्यादा कोई प्राइवेट कर्मचारी हैं, तो वो गैर राजकीय विद्यालयों के शिक्षक हैं। क्या सबको जवाब देने वालों के हक में सवाल पूछने वाला कोई नहीं है?

 

6 महीने से हम घर बैठे हैं, कोई सब्सिडी नहीं, कोई सहायता नहीं, सहायता तो बहुत दूर की बात है किये गए काम का भी यहाँ पेमेंट नहीं हो रहा है बहुत सी संस्थाओं का कारण 'कुएं में होगा तो बाल्टी में आएगा।' 

 

प्रदेश के 09 प्राइवेट स्कूल संचालकों ने आत्म हत्या कर ली है आजकल शिक्षकों के अखबार, केबिल कनेक्शन बन्द है, रिचार्ज एक ही फोन में रहता है जिसके वाईफाई का घी की तरह उपयोग किया जा रहा है क्योंकि रसोई में घी नहीं बचा है। पकवान की बजाय केवल भूख दूर करने की जद्दोजहद है।

 

दूध दो टाइम की बजाय एक टाइम आ रहा है वो भी कम होता जा रहा है आखिर उधार का दूध कब तक पियेंगे। राशन वालों की दुकानें बदली जा रही है, दुकानदारों से प्राणप्रिय भाई की तरह व्यवहार किया जा रहा है, उनके बच्चों को फ्री में पढ़ाया जा रहा है ताकि वो उधार चुकाने की जल्दी न करें। सबसे उधार मांगकर हम 'न' पहले ही सुन चुके हैं। 


आजकल भगवान से प्रार्थन भी यहीं रहने लगी है कि आज मकान मालिक किराया मांगने न आये बच्चे बिस्किट चॉकलेट की जिद करना भी छोड़ चुके हैं, कभी कभी उनको देखकर आंसू भी निकल जाते हैं, किसी की बीवी प्रेग्नेंट है तो कोई महिला शिक्षिका स्वयं प्रेगनेंसी से गुुजर रही है, आने वाली नन्ही सी नई जिंदगी को कैसी जिंदगी दे पाएंगे ये चिंता सोने नहीं देती। किसी के घर में बुजुर्ग बीमार रहते हैं, तो कोई शिक्षक स्वयं बीपी शुगर का मरीज है, नाममात्र की तनख्वाह में जैसे तैसे एक शिक्षक परिवार और उसकी उम्मीदों को पालता है, लेकिन अब उसे सपने भी आ जाए कि घर में कोई बीमार हो गया है तो सब धराशायी।

 

उम्मीदें टूट सी रही हैं, लेकिन हम कैसे टूटें हमने तो हर रोज सिखाया है, चॉक डस्टर से बनया और मिटाया है, सबको बताया है कि 'हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।' लेकिन सरकारों की अनदेखी कहीं हमें हरा न दे कहीं शिक्षक टूट न जाए हम खुद जानते हैं की हम कोई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ नहीं जिसके टूटने पर बवाल होगा, या क्रांति होगी एक शिक्षक इतनी शांति से टूटता है की अखबारों और सोशल मीडिया पर आवाज तक नहीं होती। 


मैं यह नहीं कहता कि हम शिक्षकों ने समाज पर अहसान किया है, मैं आपसे बदले में कोई आर्थिक सहायता भी नहीं मांग रहा हूँ। न ही मेरा कोई राजनैतिक स्वार्थ या एजेंडा है, मैं सीधा साधा आदमी हूँ, मुझे आंदोलन, हैश टैग, सरकार पर दबाव, धरना, हड़ताल भी नहीं आते हैं। मैं बस ईमानदारी से पढ़ान मात्र जानता हूँ।

अनुराग पांडेय

डिस्क्लेमर:
हम अपने रचनाकारों से अपेक्षा करते हैं कि इस सेक्शन में प्रकाशित करने के लिए वे जो भी रचनाएं हमें भेजते हैं, वे उनकी मौलिक रचनाएं होती हैं। हालांकि हम उसे क्रॉस वेरीफाई करते हैं फिर भी यदि कोई विवाद होता है तो आप हमें हमारे हेल्पलाइन नम्बर 08874444035 पर बता सकते हैं। सभी विवादों का न्याय क्षेत्र लखनऊ होगा।

RELATED NEWS

ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT