Home Blogs नोच लेते जिस्म को हवसी भेड़िए, आज फिर इंसान की हदें पार हुई हैं

नोच लेते जिस्म को हवसी भेड़िए, आज फिर इंसान की हदें पार हुई हैं

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फिर इन्सानियत शर्मसार हुई है,
हवानियत इन्सानियत के पार हुई है।


ना जाने क्या गुजरी होगी उस पर,
फिर जिस्म से सांसे लाचार हुई हैं।


नोच लेते जिस्म को हवसी भेड़िए,
आज फिर इंसान की हदें पार हुई हैं।


डूब मरो तुम इज्जत नहीं कर सकते औरत की,
आज फिर हिन्द की बेटी हवस की शिकार हुई है।


सबूत माग रहे होंगे वकील गुनाह बेगुनाई के,
"मनदीप"एक बार फिर बिकी अदालत सजी हुई है।

 

मनदीप साई

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