Home News कविता: एक आस और एक विश्वास है जिंदगी

कविता: एक आस और एक विश्वास है जिंदगी

"बनते बिगड़ते हालातों का हिसाब है जिंदगी।
कभी दो वक्त की रोटी की मोहताज है जिंदगी।।

 

किसी की पूरी जिंदगी रो-रोकर गुजरती है।
तो किसी की पूरी जिंदगी बिंदास होकर गुजरती है।।

 

आंखों में आंसू की लकीर बन कर आती है जिंदगी।
सोचा नहीं था ऐसी तकदीर बन कर आती है जिंदगी।।

 

किसी ने दूसरे की जिंदगी को संवारा है।
तो किसी ने दूसरे की जिंदगी को उजाड़ा है।।

 

मेरी जिंदगी बर्बाद कर वो आज भी आबाद बैठे हैं।
कर भला तो हो भला यह पुरानी बात है।।

 

कभी भला होता नहीं करके भलाई देख ली।
जरूरी तो नहीं हर कश्ती का किनारा हो।।

 

जरूरी नहीं जिसके हम हो,वो हमारा हो।
बहुत सी कश्तियां डूब जाती है बीच नहरों में।।

 

क्योंकि नहरों का पानी हाथ से हटाया नहीं जाता।

गमों की सेज है तो कहीं खुशियों का खजाना है जिंदगी।।

 

एक आस और एक विश्वास है जिंदगी।
हर रोज हमारे जीवन में एक नया अध्याय जुड़ता है।।

 

जिसमें वह अल्फाज है जिंदगी,कभी धूप,कभी छाया।
कभी खोया,कभी पाया,इसी का नाम है जिंदगी।।

 

कभी दुःख में भी खुशी मिलती है,तो कभी पसीने में भी सुगंध आती है।
जिंदगी के कुछ अफसाने अभी और भी हैं।।

 

हम रहें या न रहें जिंदगी के सफर में। 
किंतु इस जहां में कुछ रंग अभी और भी है।।

 

जिंदगी में यह हुनर भी आजमाना है।
अपनों से जंग हो तो हार कर भी जीत जाना है।"

 

कवयित्री-सुकृति वर्मा

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