Home News यह कविता छोटी सी बताएगी एक बेटी का बड़ा महत्व

यह कविता छोटी सी बताएगी एक बेटी का बड़ा महत्व

मन के मुरझाए उपवन में

सुन्दर कलरव गान है बेटी।

 

थके हुए हर एक पिता के

चेहरे की मुस्कान है बेटी।

 

उत्सव का आनन्द इन्हीं से

घर की रौनक-जान है बेटी।

 

सँजो रही हर एक रीति को

संस्कृति का परिधान है बेटी।

 

जोड़ रही दोनों कुल को जो

रिश्तों का निर्माण है बेटी।

 

गंगा जैसी पावन है जो

माँ दुर्गा का मान है बेटी।

 

विस्तार नहीं ममता का जिसकी

ऐसे नभ के समान है बेटी।

 

सदा प्रेम की अधिकारी है

बोझ नहीं वरदान है बेटी।

 

कवियत्री: शिल्पी वाजपेयी

मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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