Home News कविता: है हिम्मत तो बिन खाकी के, इक दिन भी जी कर देखें

कविता: है हिम्मत तो बिन खाकी के, इक दिन भी जी कर देखें

जो खाकी को दागी कहते, अपने दामन को देखें।
है हिम्मत तो बिन खाकी के, इक दिन भी जी कर देखें।।

 

गली, मुहल्लों, चौराहों पर, इज्जत लूटी जाएगी।
रेलों, प्लेनों, दुकानों में, आग लगाई जाएगी।।
हर घर में चोरी होयेगी, डाका डाला जाएगा।
जो इसका प्रतिकार करेगा, वो भी मारा जाएगा।।

 

ना मंत्री, अफसर या नेता, कोई ना बच पाएगा।
दुष्टों के हाथों ही सबको, यमपुर भेजा जाएगा।।
तब आएगी सुध खाकी की, क्या-क्या सहती आई है।
खुद सीने पर गोली खाकर, हमें बचाती आई है।।

 

माना गलती हो सकती है, मानव हूँ भगवान नहीं।
हम तो जनता के रक्षक हैं, दुश्मन और शैतान नहीं।।

 

धीरेन्द्र सिंह तोमर 'धीरू'
ग्राम देवरी रुखारा, बक्सी का तालाब, लखनऊ
संपर्क सूत्र- 9415018806
Email-contactdstomar@gmail.com

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