Home Blogs बचपन में ही बच्चों को कराएं उनके कर्तव्यों का बोध

बचपन में ही बच्चों को कराएं उनके कर्तव्यों का बोध

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बात लगभग तीन साल पुरानी है जब सरकार का इतना जोर हेलमेट पर नही था मेरा यह मतलब बिल्कुल नहीं कि सरकार का ध्यान था ही नहीं लेकिन कम जरूर था। अभी कुछ दिन से जब सरकार ने बहुत ध्यान देना शुरू कर दिया तो मुझे भी वो वाक्या याद आ गया जब हमारी भतीजी हेलमेट के लिए अड़ गयी बोली साइकिल तो आप ने दिला दी पर हेलमेट कौन दिलाएगा। 

 

मैंने समझाया बेटा साइकिल के लिए हेलमेट जरूरी नही है। उसने कहा क्यों बाबा तो पापा, चाचा सबको समझाते है कि हेलमेट पहनो तो हम क्यों नहीं बहुत जिद करने पर जब हमने उसे अपना ही हेलमेट दिया तब जाकर मानी। 

 

मेरे कहने का मतलब सिर्फ यह है कि हमें जो भी चीजें आगे चलकर करनी ही हैं वो अपने बच्चों को हमें बचपन से ही सिखाना होगा। नहीं तो आगे चलकर वह उसे करने में शर्म महसूस करने लगते हैं। इसलिए हम सबको अपने बच्चों में संस्कार, कर्तव्य एवं रहन-सहन के तरीकों को बताना होगा।

 

कुमार अनुराग पांडेय 
लखनऊ

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