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सुनों तुम तो कहते थे प्यार करता हूं, देखो तुम ने मेरा क्या हाल बना दिया

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मानती हूं तुम प्यार करते होगे मुझ से,
मैं प्यार करती हूं या नहीं मेरी भी मर्जी पूछते मुझ से।
तेरे गुस्से में तेजाब था देखो तुम ने मेरा चहरा गुलाब सा खिला दिया,
तुम ने मेरे मन की एक बार भी नहीं जानी और मेरा तुम ने जिस्म जला दिया।।

 

अब क्या बताऊं हालत मेरी खुद की मैं पहचान भी नहीं कर पाती,
डर मुझे  तुम से नहीं लगता पर  देखते ही आइना मै खुद से डर जाती।
अब तो आ जाओ मुझे लेने अब क्यों मुझे अकेला छोड़ दिया,
तुम ने मेरे मन की एक बार भी नहीं जानी और मेरा तुम ने जिस्म जला दिया।।

 

दर्द की एक हद को मैंने खुद सहते हुए देखा है,
पल पल मरना क्या होता है मैंने खुद को मरते देखा है।
तुम मेरे जिस्म के भूखे थे लो ये जिस्म भी तुम को सौंप दिया,
तुम ने मेरे मन की एक बार भी नहीं जानी और मेरा तुम ने जिस्म जला दिया।।

 

कितने फिरते हैं दिल फेक आशिक इस जमाने में,
नोचते सिर्फ शरीर को वफा की कौन उम्मीद करे इस जमाने में।
"मनदीप"होते मर्द जिस्म के भूखे देखो आज तुम ने ही बता दिया,
तुम ने मेरे मन की एक बार भी नहीं जानी और मेरा तुम ने जिस्म जला दिया।।

 

मनदीप साई
कुरुक्षेत्र

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