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धृष्टता थी तुम्हारी सहन हम किए, प्यार में जब जुटे टूटे हम तो नहीं

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तुम तो काटते रहे हम कटे तो नहीं,
तुम हटाते रहे हम हटे तो नहीं।
धृष्टता थी तुम्हारी सहन हम किए,
प्यार में जब जुटे टूटे हम तो नहीं।।

 

तिमिर हो गहन तो दीप बुझते नहीं,
राह जुगनू सहारे तो कटते नहीं।
दर्द की ये निशा कल मिट जाएगी,
साथ तेरा जो मिला तो मिटते नहीं।।

 

दोपहर में तो दीपक हैं जलते नहीं,
जहर हो दिलों मे प्यार पलते नहीं।
आंधी की ये तबाही गुजर जाएगी,
प्यार में हो कलुषता तो निभते नहीं।।

 

साथ चलने लिए कदम घटते तो नहीं,
बात कुछ भी रहे हम हैं डरते नहीं ।
बात तीखी जो है वो तो मिट जाएगी,
नेह में जो रहा वो तो हटते नहीं।।

 

डॉ गौरव त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर 
मीरजापुर

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