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छुप कर रो लेना घर के किसी कोने में, दिल के साथ खेलने वाले अपने ही होते हैं

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इश्क झूठा नहीं झूठे लोग होते हैं, 
सच्चे दिल वाले खुदा जैसे होते हैं।

 

क्यो हंसती है अब मेरा दिल तोड़कर, 
ना जाने क्यो हमेशा सच्चे दिल रोते हैं।

 

इबादत के तीनों पहर मांगा था जिसे, 
वहीं दिल के दगाबाज होते हैं।

 

छुप कर रो लेना घर के किसी कोने में,
दिल के साथ खेलने वाले अपने ही होते हैं।

 

झूठा है इश्क अब कब तक मेरा हाथ थामोगे, 
चालाकियां करने वाले ही दिल के चोर होते हैं।

 

खुदा ना करे फिर रहमत हो तुम्हें इश्क की, 
सच्चे आशिकों के लुटे जमाने होते हैं।

 

इश्क का परिंदा 'मनदीप' मजबूरियों के जाल में फंस गया, 
दिमागी लोग इश्क के शिकारी होते हैं।

मनदीप साई

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