Home Blogs वृद्धावस्था में भी उसी का साथ पाना, उपलब्धियों को अपने दिल में संजोना

वृद्धावस्था में भी उसी का साथ पाना, उपलब्धियों को अपने दिल में संजोना

EduBeats

एक सफर जिसका अंत हमने न देखा,
एक जंग जिसका अंत तक है सामना करना।


अंतर्मन के बंद बक्से में पड़ी सुहानी यादों को बार-बार देखना,
एक मुसाफिर बन अपने मंजिलों को ढूंढना।


खोने और पाने का चलता सिलसिला,
गम की रातों से खुशी के उजालों का मिलना।


बचपन से जवानी तक के उड़ें हुए वक्त,
यारों के यारी में समय के बीत जाने की लत।


दिल को एक कश्ती के पाने की चाह,
जैसे दो ऋतुओं के मिलन का हो माह।


वृद्धावस्था में भी उसी का साथ पाना,
उपलब्धियों को अपने दिल में संजोना।


जरूरतों और चाहतों के बीच एक उलझी हुई  परिभाषा,
कुछ पूरी हुई अभिलाषाएं और एक अंतिम निराशा।

 

आईषी पाल

डिस्क्लेमर:
हम अपने रचनाकारों से अपेक्षा करते हैं कि इस सेक्शन में प्रकाशित करने के लिए वे जो भी रचनाएं हमें भेजते हैं, वे उनकी मौलिक रचनाएं होती हैं। हालांकि हम उसे क्रॉस वेरीफाई करते हैं फिर भी यदि कोई विवाद होता है तो आप हमें हमारे हेल्पलाइन नम्बर 08874444035 पर बता सकते हैं। सभी विवादों का न्याय क्षेत्र लखनऊ होगा।

RELATED NEWS

ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT