Home Blogs लेकिन ना जानें क्यों कानून बनाने से,  तुम अक्सर ही पीछे हट जाते हो

लेकिन ना जानें क्यों कानून बनाने से,  तुम अक्सर ही पीछे हट जाते हो

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इक बेटी की जान को लेकर, 
क्या शर्म तुम्हें बिल्कुल ना आई।  
घर में होते हुए बेटियाँ तुमको,
क्यों बेटी की कीमत समझ ना आई ॥ 

 

किया है तुमने जो कृत्य घिनौना, 
वो केवल फाँसी के ही लायक है। 
उस रोते बिलखते परिवार से पूछो, 
उसको यह कितना पीड़ादायक है॥ 

 

ओ भावी सत्ता में बैठे ठेकेदारों, 
अब तो तुम थोड़ी सी शर्म करो। 
बना के इक कानून कड़ा अब,
क्यों ना इक नया अध्याय रचो॥ 

 

मिले उसे तुरंत ही फाँसी, 
जो ऐसे घिनौने काम करे। 
इस हिंद देश की माटी को, 
जो यूँ सरेआम बदनाम करे॥

 

केवल कुछ वोटों की खातिर तुम, 
हरदम कोरे वादे ही कर जाते हो।
लेकिन ना जानें क्यों कानून बनाने से, 
तुम अक्सर ही पीछे हट जाते हो।।

 

गर चाहो तुम बेटियाँ सुरक्षित,
तो आगे बढ़कर कुछ काम करो। 
बचे नहीं कोई भी हत्यारा, 
ऐसा कुछ तुम इंतजाम करो॥

 

नूप पाण्डेय

नई दिल्ली

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