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प्रेम का पुजारी बन प्रेम रोग समझाना है, कभी हंसना कभी रुलाना है

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रंग मंच का खेल भी निराला है,
कभी हंसना कभी रुलाना है।

 

इश्क मोहब्बत हमें सीखाते,
रिश्तों की अहमियत हमे बताते।
कला के अनेक रूपो में ढल जाना है,
कभी हंसना कभी रुलाना है।।

 

जिंदगी का छोटा सा सफर,
इरफान का बनना पान सिंह तोमर।
अपनी अदाकारी से सबको हंसाना है,
कभी हंसना कभी रुलाना है।।

 

दिलो की होती कभी हार जीत,
ऋषि दा के बॉबी के सुनहरे गीत।
प्रेम का पुजारी बन प्रेम रोग समझाना है,
कभी हंसना कभी रुलाना है।।

 

कभी जुबां बन कर चढ़ते गीतों के बोल,
याद रखते हमेशा रंग मंच के सदबाहर डायलॉग।
एक दिन"मनदीप"सब को रूला कर चले जाना है,
कभी हंसना कभी रुलाना है।।

 

मनदीप साई

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