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ABVP पर कविता: संघ के हम सैनिक हैं, हम सब हैं भगवा वाले

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हम ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।
संघ के हम सैनिक हैं, हम सब हैं भगवा वाले।।
विद्यार्थी परिषद वाले हैं, अपने अंदाज निराले।
हम सब ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।।

 

अपना तो बस भारत माता से, प्रेम-शौर्य का नाता है।
जय जय भारत माता का, अपना ही तो एक नारा है।।
कहो गर्व से हम हिन्दू हैं, हिंदुस्तान हमारा है।
हिंदुस्तान हमारा है।।

 

पड़े जरूरत छोड़ के शिक्षा, हम हैं शस्त्र उठाते।
हम हैं शस्त्र उठाते।।
हम ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।
हम सब ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।।

 

देश-धर्म है प्राण से प्यारा, कान खोलकर सुन लेना।
जिनकी भारत माता ना हो, देश कोई और चुन लेना।।
देशद्रोही, गद्दारो को हम सब मार निकालें।
विद्यार्थी परिषद वाले हैं, अपने अंदाज निराले।।
हम है ABVP वाले, हम हैं ABVP वाले।।

 

ABVP ने ठाना है ये, भगवान राम भी संग में हैं।
उत्तर-पूरब-पश्चिम-दक्षिण, कार्यकर्ता सब रंग में हैं।।
मैं सौरभ मिश्रा लिखता, कोई रोक के दिखाये।
हम ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।।

 

आंबेकर जी के सैनिक हैं, हम सब भगवा वाले।
हम ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।।
हम ABVP वाले हैं, अपने अंदाज निराले।।

 

रचनाकार: सौरभ मिश्रा
5, नवीन मार्केट, कैसरबाग, लखनऊ

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