Home Blogs कविता: सम्मान कभी गिरने न दो

कविता: सम्मान कभी गिरने न दो

EduBeats

बात चाहें जो भी हो जग में,
सम्मान कभी भी गिरने न दो।
अड़े रहो तुम संघर्षों के आगे,
हिम्मत को कभी डिगने न दो।।

 

कोई नही पाता एक पल में,
अपनी मन चाही मंजिल को।
लगे रहो तुम सदा प्रयत्नों में,
साहस को कभी डिगने न दो।। 

 

आज नहीं तो कल को यारा, 
तुम मंजिल को पा ही जाओगे।
लेकिन मंजिल को पाते ही तुम, 
स्वंय खुद ही में बदलाव न दो।।

 

जुड़ा जो होता जमीं से इंसा,
वो एक न एक दिन ऊपर जाता है।
देख के उसके बुलंद हौसले,
आसमां भी झट से झुक जाता है।। 

 

सब देते हैं उसको विजय बधाई, 
वो जग में एक सीख नई धर जाता है। 
माना हमनें कि इस दुनियां में,
कुछ तुम पर ही प्रश्न उठाएंगे।।

 

लेकिन उन प्रश्नों का देकर उत्तर,
तुम एक इतिहास नया ही गढ़ देना।
जो रहते हैं सदा अंधे नफरत में,
तुम उनको भी प्रेम सदा ही देना।।

 

कवि-अनूप पाण्डेय 
नई दिल्ली

डिस्क्लेमर:
हम अपने रचनाकारों से अपेक्षा करते हैं कि इस सेक्शन में प्रकाशित करने के लिए वे जो भी रचनाएं हमें भेजते हैं, वे उनकी मौलिक रचनाएं होती हैं। हालांकि हम उसे क्रॉस वेरीफाई करते हैं फिर भी यदि कोई विवाद होता है तो आप हमें हमारे हेल्पलाइन नम्बर 08874444035 पर बता सकते हैं। सभी विवादों का न्याय क्षेत्र लखनऊ होगा।

RELATED NEWS

ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT