Home News उत्तर प्रदेश के पाठ्यक्रम में शामिल हो सिंधी महापुरुषों का इतिहास- नानक चंद्र लखवानी

उत्तर प्रदेश के पाठ्यक्रम में शामिल हो सिंधी महापुरुषों का इतिहास- नानक चंद्र लखवानी

हमारा देश अनेकों भाषाओं के आधार के रूप में जाना जाता है। उन्हीं भाषाओं के उत्थान और विकास के लिए, उसी समाज का एक व्यक्ति ऐसा खड़ा होता है जो अपनी भाषा को ऊँचे शिखर पर पहुंचाने के लिए निरन्तर प्रयास करता रहता है। भाषाओं की उस सूची में एक भाषा है, सिंधी भाषा। इस भाषा के विकास के लिए अपने समाज को लगातार अवगत कराने की कोशिश करने वाले उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी के उपाध्यक्ष नानक चंद्र लखवानी जी से एजुकेशन बीट्स की रिपोर्टर निमिषा बाजपेयी और पूर्ति सिंह की खास बातचीत के कुछ अंश-


1-सिंधी हिंदू समुदाय की मातृ-भाषा कही जाती है लेकिन आज भारत में आम बोलचाल से यह भाषा एक तरह से गायब सी हो गई है, इसके पीछे क्या कारण है?

आज के समय में सिंधी भाषा जिस तरह से विलुप्त हो रही है, उसी को ध्यान में रखते हुए हमारी तरफ से निरन्तर कार्यक्रम किए जा रहे हैं। सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी को बनाने का कारण भी यही था कि विलुप्त हो रही सिंधी भाषा का विकास किया जा सके और आज के समय में देखा जाए तो विकास हो भी रहा है। सिंधी गीत-संगीत, सिंधी कल्चर, सिंधी साहित्य का विकास करने के लिए हमारी सिंधी अकादमी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम करती रहती है। 


2-सिंधी भाषा के विस्तार के लिए सिंधी अकादमी की तरफ से किस तरह के कार्यक्रम किए जा रहे हैं?

सिंधी भाषा के विस्तार के लिए सिंधी अकादमी यहां की महिलाओं को रीति-रिवाज, सिंधी की संस्कृति को दिखाने का प्रयास करती है, सिंधी की क्या सभ्यता है उसे भी लोगों से अवगत कराती है। साथ ही सिंधी भाषा अन्य भाषाओं के साथ जुड़ कर किस प्रकार कार्य करती है, हम वह भी बताने का प्रयास करते हैं।

 

3-सिंधी भाषा की कोई खास बात, जो आपको सिंधी से दूर नहीं जाने देती?

सिंधी भाषा की एक खास बात है कि वह हमारे लिए कॉन्फिडेंशियल भाषा है। मेरा मानना है कि किसी भी समाज या भाषा को खत्म करना है तो सबसे पहले उसके गीत-संगीत, साहित्य, संस्कृति को खत्म कर दीजिए। समाज के साथ भाषा स्वतः ही खत्म हो जाएगी। हम अपने बच्चों को यही सिखाते हैं कि कुछ भी खत्म हो जाए लेकिन अपनी भाषा को जरूर जीवित रखिए क्योंकि आज के समय में किताबी ज्ञान, लिखना-पढ़ना  सब कुछ समाप्ति की ओर है। जो कुछ भी अब हो रहा है, वह सब कुछ भाषा के आधार पर ही हो रहा है। आज उसी भाषा को हम जिंदा रखने के लिए कक्षाएं चलाते हैं, बच्चों के साथ बैठक करते हैं, कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं। जिससे वे भी जाने और समझें कि आज के समय में भाषा का कितना महत्व है। समय-समय पर हम प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर विभिन्न स्थानों पर सिंधी भाषा से जुड़े हुए कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।

 

4-सिंधी भाषा के विकास के लिए उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में क्या योजनाएं हैं?

योजनाएं हमारे पास बहुत हैं किन्तु उन्हीं योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए प्रयोग में आने वाले संसाधन सीमित हैं। हालांकि हमारी भाषा के विकास के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने भी हमसे लगातार प्रयास करने के लिए कहा है। सिंधी अकादमी अपनी सिंधी भाषा को लोगों तक पहुँचाने के हर संभव प्रयास कर रही है। आज जो सिंधी समाज अपनी भाषा में रुचि नहीं ले रहा है, हम अपने कार्यक्रमों के माध्यम से उनमें भाषा के प्रति रुचि जगाने का प्रयास कर रहे हैं। आप को बता दें कि सिंधी भाषा कभी-कभी ऐसे नाटकों का भी आयोजन करती है जो राष्ट्र और देश को समर्पित हो। 

 


 

5-अकादमी की तरफ से सिंधी भाषा के अस्तित्व को बचाने के लिए आप किस तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं?

आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए सबसे अधिक चुनौतियां हमें अपने ही समाज की नई पीढ़ियों से मिलती हैं क्योंकि उन्हें न सिंधी आती है और न ही वे बोलते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भी यह है कि उनके घरों की जो महिलाएं हैं वे ही सिंधी नहीं बोलती हैं। अब घर की महिलाएं ही जब अपनी भाषा का प्रयोग नहीं करेंगी तो आने वाली युवा पीढ़ी कैसे बोलेगी? आज बच्चे की उम्र ढ़ाई से तीन वर्ष तक होते ही उसे कान्वेंट स्कूल में डाल दिया जाता है, अब यह तो सोचने वाली बात है कि जब बच्चा सिंधी पढ़ेगा नहीं तो इस भाषा के महत्व को कैसे समझेगा और कैसे बोलेगा? सच कहूं तो जब तक हम लोग जीवित हैं, तभी तक यह भाषा भी जीवित है। हमारे रहते-रहते यह भाषा लुप्त न हो जाए, बस इसी लिए निरन्तर प्रयास कर रहे हैं। आज अपने समाज के बच्चों को सिंधी सिखाने के लिए हम किताबें, पेन-पेंसिल, खाने-पीने की वस्तुओं के साथ अध्यापक तक मुफ्त में उपलब्ध कराते हैं।

 

6-जब भाषा के महत्व को समझाने के लिए आप स्कूलों में जाते हैं तो बच्चों की तरह से कैसे रिस्पॉन्स मिलता है?

बच्चों की तरह से बिल्कुल अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिलता और यहीं पर बात अगर उनके माता-पिता की करें तो वे हमें लिख कर देते हैं कि हमारे बच्चों को सिंधी पढ़ाने का प्रयास न करें। सबसे अधिक कष्ट इसी बात का होता है कि माता-पिता ही मना कर देते हैं।

 

7-पैरेंट्स के इस बर्ताव के पीछे आप क्या कारण मानते हैं?

कारण जहां तक देखा जाए तो उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को बिना किसी फायदे के क्यों पढ़ाए? जबकि आठवें शेड्यूल में यह भाषा है, हम आईएएस की परीक्षा भी इस भाषा में दे सकते हैं। इसके लिए इस भाषा में आईएएस के क्लासेज लगाना भी शुरू कर दिया है। आईएएस के लिए बच्चों को प्रेरणा देना भी शुरू कर दिया है कि वे भी इस भाषा का ज्ञान प्राप्त कर आईएएस की परीक्षा में प्रवेश करें। हम प्रयास कर रहे हैं लेकिन कितनी कामयाबी मिलेगी, इसपर अभी कुछ कह नहीं सकते।

 

8-आपने उपाध्यक्ष का पदभार जुलाई में संभाला था, तब से अब तक कोई ऐसा काम जिससे आपको आत्मिक संतुष्टि हुई हो?

हमारा जीवन शुरू से ही राजनीति में बीता है। लगभग 40 वर्षों तक मैं राजनीति में रहा। इसी दौरान मेरे 22 वर्ष सिर्फ अलग-अलग वार्डो में पार्षद के रूप में गुजरे। तब से लेकर आज तक जो भी सामाजिक कार्य करने को मिला या आज भी मिलता है तो उसे करने में आनन्द तो मिलता ही है और अब तो अपने ही समाज का कार्य करने का अवसर पार्टी ने दिया तो अच्छा लगना स्वाभाविक है। हम यह प्रयास करते हैं कि हमारी तरह से 100 से 500 बच्चे कुछ ऐसा सीखें जिससे कि वे आने वाली पीढ़ियों को तैयार कर सकें। सरकार ने हमें ये मौका दिया, यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है।

 


9-सिंधी भाषा की वर्णमाला सबसे बड़ी है। यानी कि यह व्याकरण के लिहाज से सबसे शुद्ध रहती होगी, इसके बावजूद इस भाषा की स्थिति लगातार कमजोर क्यों होती जा रही है?

बंटवारे के बाद हमारा अपना अलग प्रान्त न होने की वजह से ऐसा हुआ। पहले हमारे राजनेता कहते थे कि जो सुंदर मोतियों की माला थी, वह आज पूरे देश में बिखर सी गई है। आज हम लोगों की माला भी मोतियों की तरह टूट कर फैल सी गई है। आज जहां-जहां पर हम हैं, वहां पर अपनी मेहनत और लगन से सक्षम हैं। हमारे पुर्खों ने जो हमें मेहनत, ईमानदारी, शिष्टा का भाव सिखाया है आज उसी के कारण हम कामयाब हैं। आज हमारी भाषा छूट गयी क्योंकि हम एकत्र नहीं हो पाए। आज हम सभी देश के अलग अलग कोने में रहते हैं। जब तक हम एक पास नहीं रहेंगे, तब तक विकास किस प्रकार होगा? आप पंजाब चले जाइये, वहां सभी पंजाबी बोलते हैं। आज अगर हमारा अलग प्रांत होता तो हमें इतनी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। हम लोगों को हो रही इतनी समस्याओं का मुख्य कारण बंटवारा ही है।

 

10-सिंधी भाषा को प्राथमिक से लेकर माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में यदि एक ऐच्छिक विषय के तौर पर शामिल किया जाए, तो कैसा रहेगा?

आज गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में हमारे सिंधी महापुरुषों के पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं, बस उत्तर प्रदेश में ही ऐसा नहीं है। इसके लिए मैं प्रयास कर रहा हूँ कि यहां के पाठ्यक्रम में भी सिंधी महापुरुषों, सिंधी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को जोड़ा जाए। जो हमारे शहीदों का जीवन-परिचय है, उसे पाठ्यक्रम में जोड़ा जाए। इसके लिए हम सरकार से विचार-विमर्श भी कर रहे हैं।


11-सरकार का इस पर क्या रुख है और कब तक इस पर निर्णय आएगा?

सरकार का रुख तो सकारात्मक दिख रहा है। चल रहे विचार-विमर्श से तो ऐसा प्रतीक हो रहा है कि जो निर्णय आएगा, वह हमारे पक्ष में ही आएगा और  यदि बात करें कि कब तक आएगा?  तो इस पर मैं यही कहूंगा कि निर्णय सरकार के इसी कार्यकाल में आने के आसार दिख रहे हैं।


12-एजुकेशन बीट्स के लिए कोई शुभकामना संदेश या सुझाव।

आप अनेकों भाषाओं को एक साथ लेकर चल रहे हैं, यह सबसे अच्छी बात है। प्रांत न होने के कारण हम पिछड़े हैं। सिंधी भाषा को प्रमोट करने के लिए हम आप से सहयोग की आशा करते हैं।

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