Home News यूपी: फर्जी डिग्री वाले 90 शिक्षक बर्खास्त, मुकदमे दर्ज कराने के निर्देश

यूपी: फर्जी डिग्री वाले 90 शिक्षक बर्खास्त, मुकदमे दर्ज कराने के निर्देश

कासगंज
बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षकों की फर्जी डिग्रियां मिलने पर शासन ने सोमवार के जनपद के कई शिक्षिक-शिक्षिकाओं को बर्खास्त कर दिया है। इन शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। 

 

उत्तर प्रदेश के जिले कासगंज में शिक्षकों-शिक्षिकाओं में हड़कंप मच गया है। वर्ष 2004-05 के दौरान बीएड की पढ़ाई करके 90 शिक्षकों ने वर्ष 2008 और 2015 के दौरान हुई तीन भर्तियों के माध्यम से नौकरी प्राप्त कर ली थी। नियुक्तियां होने के बाद विभाग ने परिषदीय स्कूलों में इन्हें तैनाती भी दे दी थी। प्रदेश में बीएड डिग्री के फर्जीवाड़े के मामले सामने आने पर शासन ने शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की एसआईटी से जांच कराई, जिसके बाद जांच में बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई। मामले की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने कार्रवाई करते हुए फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों को बर्खास्त करने का फैसला लिया।


 

शासन से आदेश आते ही समाप्त हुई सेवा

बीते सोमवार को शासन से आदेश आते ही बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजली अग्रवाल ने जिले के 90 शिक्षक-शिक्षिकाओं की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए। इसकी सूचना शिक्षक-शिक्षिका को दे दी गई है। फर्जी डिग्री के द्वारा शिक्षक कासगंज, अमांपुर, गंजडुंडवारा, सिढ़पुरा, सहावर और पटियाली ब्लॉक क्षेत्रों में तैनात थे। 

 

बीएसए की लापरवाही भी आई सामने

हालांकि इस मामले पर और जानकारी लेने के लिए जब बीएसए कासगंज से बात करने का प्रयास किया गया तो दर्जनों बार फोन करने के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। अब सवाल यह है कि 24 घण्टे आम जनता के सवालों का जवाब देने का दावा करने वाले सीयूजी नम्बर जब रिसीव नहीं होते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों को दिए ही क्यों जाते हैं?

 

एडी बेसिक ने भी बीएसए की लापरवाही को किया नजरअंदाज

बीएसए कासगंज द्वारा दर्जनों बार फोन न उठाने वाली लापरवाही की शिकायत जब क्षेत्र से सम्बंधित एडी बेसिक से की गयी तो उन्होंने भी मामले से किनारा करते हुए यह कहा कि, " जो नम्बर आप के पास है, वही हमारे पास भी है। आप कॉल करते रहिए, जल्दी ही उठाएंगे"। एडी बेसिक के इस जवाब से यह तो साबित हो गया कि सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कितनी भी व्यवस्थाएं कर ले, कितनी भी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दे। लेकिन ऐसे लोगों को जिम्मेदारी से दूर भाग कर सरकार से सिर्फ वेतन लेना होता है।

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